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राहुल के सामने कर्नाटक में बच्ची बोली- पापा नहीं रहे:कहा- वो पेंसिल लाकर देते थे, मुझे डॉक्टर बनना है; बातें सुन सबकी आंखें छलकीं

राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा कर्नाटक में प्रवेश कर चुकी है। 30 सितंबर को राहुल ने कोरोना के दौरान ऑक्सीजन की कमी से जान गंवाने वालों के परिजन से चामराजनगर के गुंदलुपेट शहर में मुलाकात की। इस दौरान 7 साल की बच्ची की स्पीच ने वहां मौजूद हर शख्स को भावुक कर दिया। इस बच्ची के पिता की कोरोना से मौत हो चुकी है।

प्रतीक्षा ने कहा- पापा को समय पर ऑक्सीजन नहीं मिली
करीब 7 साल की प्रतीक्षा ने कहा, ‘मेरे पिता की कोरोना से मौत हो गई, उस समय ऑक्सीजन की कमी थी। जब पापा थे तो मैं उनसे पढ़ाई के लिए सारी जरूरी चीजें मंगवा लेती थी। मेरे एक बार कहने पर वो पेन्सिल और किताबें लाकर देते थे। पापा कोरोना में नहीं रहे क्योंकि उन्हें समय पर ऑक्सीजन नहीं मिल पाई।

लोग कह रहे थे कि उस समय ऑक्सीजन की कमी थी। अब मेरी मां के पास पैसे नहीं हैं कि वो मेरे लिए कुछ खरीद पाएं। अगर मेरी मां को सरकारी नौकरी मिल जाए तो मैं अच्छे से पढ़ पाऊंगी। मैं डॉक्टर बनना चाहती हूं और लोगों की जान बचाऊंगी।’

महिलाओं को बच्चों के भविष्य की चिंता
इस दौरान कई और महिलाओं ने बताया कि कैसे ऑक्सीजन की कमी से उनके पति, भाई और रिश्तेदारों की मौत हुई। एक महिला ने कहा कि पति की मौत की वजह से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। अगर हमें सरकारी मदद नहीं मिलेगी तो बच्चों के भविष्य का क्या होगा।

राहुल ने पीएम मोदी से किए सवाल
कोरोना प्रभावित परिवारों से मिलने के बाद राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी, प्रतीक्षा की बात सुनें, जिसने भाजपा सरकार के कोविड कुप्रबंधन की वजह से अपने पिता को खो दिया। अब वह अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए मदद मांग रही है। क्या COVID पीड़ितों के परिवार उचित मुआवजे के पात्र नहीं हैं? आप पीड़ितों को उनका अधिकार क्यों नहीं दे रहे।

सरकारी आंकड़ों में मृतकों की संख्या सिर्फ तीन
राहुल ने कहा कि कर्नाटक सरकार के आंकड़ों में राज्य में ऑक्सीजन की कमी से मरने वालों की संख्या सिर्फ 3 है। न्यू इंडिया में लोगों की संख्या कम हो गई है। लोग सरकार से कह रहे हैं कि मेरे पिता, मां या भाई बहन कोरोना में नहीं रहे, लेकिन वो मानने को तैयार नहीं। सरकार इन सभी परिवारों को आर्थिक मदद दे।

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