ब्रेकिंग न्यूज़
ब्रेकिंग न्यूज़ मध्यप्रदेश

मध्य प्रदेश:लोकगीत सम्राट देशराज पटैरिया का हार्ट अटैक से निधन; दिन में नौकरी और रात में गाते थे देशराज, सीएम शिवराज ने कहा- एक सितारा खो दिया

भोपाल
लोकगीत सम्राट देशराज पटैरिया का शनिवार सुबह दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया।
  • मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा- देशराजजी के रूप में आज संगीत जगत ने अपना एक सितारा खो दिया
  • देशराज पटैरिया ने 10 हजार से भी ज्यादा बुंदेली लोकगीत गाए, प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने भी दुख जताया

बुंदेली लोकगीत सम्राट गायक देशराज पटैरिया का शनिवार को सुबह दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वे 67 वर्ष के थे। पटैरिया को बुंदेलखंड की शान माना जाता था। उनके गाए लोकगीत घर-घर सुने और गाए जाते थे। खासकर आल्हा और हरदौल की वीरता के लोकगीत बेहद लोकप्रिय हुए थे। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देशराज पटैरिया के रूप में आज हमने संगीत जगत का एक सितारा खो दिया। पटैरिया का अंतिम संस्कार भैंसासुर मुक्तिधाम में किया गया।

शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर श्रद्धांजलि दी –

पटैरिया के निधन पर प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने दुख जताया। उन्होंने कहा कि पटैरिया बुंदेलखंड के सुप्रसिद्ध लोकगीत गायक और भजन सम्राट थे।

देशराज पटैरिया को बुंदेलखंड में लोकगीतों का सम्राट माना जाता है।
देशराज पटैरिया को बुंदेलखंड में लोकगीतों का सम्राट माना जाता है।

बुंदेलखंड के लोकगीत सम्राट कहे जाने वाले देशराज पटैरिया का जन्म 25 जुलाई 1953 को छतरपुर जिले के तिंदनी गांव में हुआ था। चार भाइयों और दो बहनों में वे सबसे छोटे थे। हायर सेकेंडरी पास करने के बाद उन्होंने प्रयाग संगीत समिति से संगीत में प्रभाकर की डिग्री हासिल की। इसके बाद पटैरिया को स्वास्थ्य विभाग में नौकरी मिल गई। लेकिन उनका मन नौकरी से ज्यादा बुंदेली लोकगीत में रमा रहा। वे दिन में नौकरी करते थे और रात में बुंदेली लोकगीत गायन में भाग लेते थे।

1976 में आकाशवाणी से मिली पहचान
वर्ष 1972 में देशराज ने मंचों पर लोकगीत गाना शुरू किया। लेकिन उनको असली पहचान वर्ष 1976 में छतरपुर आकाशवाणी से मिली, तब उनका गायन आकाशवाणी से प्रसारित होने लगा। जिसके बाद धीरे-धीरे बुंदेलखंड में उनकी पहचान बढ़ने लगी। उन्होंने 10 हजार से भी ज्यादा लोकगीत गाए।

पटेरिया प्लेबैक सिंगर मुकेश को अपना आदर्श मानते थे
वर्ष 1980 आते-आते उनके लोकगीतों के कैसेट मार्केट में आ गए। इसके बाद पटैरिया के लोकगीतों का जादू बुंदेलखंड वासी की जुबां पर दिखने लगा। उन्होंने बुंदेलखंड के आल्हा हरदौल ओरछा इतिहास के साथ-साथ रामायण से जुड़े हास्य, श्रृंगार संवाद से जुड़े संवाद के भी लोकगीत गाए। बुंदेलखंड में पटैरिया के नाम सबसे ज्यादा लोकगीत गाने रिकॉर्ड है। वे बॉलीवुड प्ले बैक सिंगर मुकेश को अपना आदर्श मानते थे।

संबंधित पोस्ट

नक्सलियों के सरेंडर से बड़ा खुलासा:सिलगेर आंदोलन में शामिल होने हार्डकोर नक्सली देवा और जयलाल ग्रामीणों पर बना रहे दबाव

Khabar 30 din

MP: 11 साल से सप्ताहभर लेट आ रहा मानसून:सिर्फ पिछले साल निसर्ग तूफान के कारण 14 जून को पहुंचा था, इस बार समय पर आने की उम्मीद

Khabar 30 din

अच्छे वेंटिलेशन से संक्रमण का खतरा होता है कम, महामारी से बचाव के लिए भारत सरकार ने जारी की एडवाइजरी

Khabar 30 din

डेढ़ फीट की नाली में गिरकर महिला की मौत:अंधेरे में सीमेंट की स्लैब पार करते समय फिसला वृद्धा का पैर

Khabar 30 din

केंद्र सरकार तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करे: चन्नी

Khabar 30 din

महाराष्ट्र: भिवंडी में इमारत गिरने से अब तक कम से कम 10 लोगों की मौत

Khabar 30 din