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रेल यात्रियों के लिए अच्छी खबर:अब स्लीपर और जनरल क्लास में भी होगा एसी; आपके पॉकेट पर नहीं पड़ेगा अतिरिक्त भार, कम खर्च में कर सकेंगे आरामदायक सफर

  • स्लीपर कोच को इकॉनामिकल एसी 3 टायर क्लास कोच में बदला जाएगा
  • अपग्रेडेड एसी कोच में 72 बर्थों की जगह 83 बर्थ होंगी

रेल यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। भारतीय रेलवे अब आम नागरिकों को कम खर्च में एसी कोच में सफर करने की सुविधा मुहैया कराने की तैयारी में है। खबर है कि रेलवे देशभर में एसी ट्रेन चलाने की योजना बना रहा है जिससे यात्रियों को कम खर्च में बेहतर सफर की सुविधा मिलेगी। इसके तहत रेलवे ने स्लीपर और गैर-आरक्षित कैटेगरी यानी कि अनारक्षित कोच को एसी कोच में बदलने का प्लान तैयार किया है।

स्लीपर कोच बनेगा इकॉनॉमिक्स एसी 3 टायर कोच

रेलवे अधिकारी की मानें तो ट्रेन का अपग्रेडेड स्लीपर क्लास कोच को इकॉनामिकल एसी 3 टायर क्लास कोच कहा जाएगा। वहीं अनारक्षित कोच के जनरल डिब्बों को भी एसी कोच में बदला जाएगा। यह एसी-3 टायर क्लास और नॉन एसी स्लीपर क्लास कोच के बीच की कैटेगरी का कोच होगा।

प्रत्येक कोच को बनाने में खर्च होगा 3 करोड़ रुपए

एक अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, रेलवे के इस प्लान पर कपूरथला रेल कोच फैक्ट्री में काम शुरू हो गया है। इसका प्रोटोटाइप तैयार किया जा रहा है। अपग्रेडेड एसी कोच में 72 बर्थों की जगह 83 बर्थ होंगी। पहले चरण में ऐसे 230 कोच बनाए जा रहे हैं। प्रत्येक कोच लगभग 3 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया जाएगा।

इससे रेलवे को है अच्छी कमाई की उम्मीद

इसके अलावा जनरल क्लास के कोच को भी 100 सीट के एसी डिब्बों में बदला जाएगा। अधिक बर्थ और मांग के चलते रेलवे को इकॉनॉमिक्स एसी 3-टियर से अच्छी कमाई की उम्मीद है। साथ ही भारतीय रेलवे का मकसद ऑल एसी मॉडल की दिशा की ओर बढ़ना है। बेहतर स्पीड और सुरक्षा के लिए दोनों तरह के अपग्रेडेड कोच एलएचबी प्लेटफॉर्म पर बनाए जाएंगे।

पहले भी बन चुकी है ऐसी योजना

बता दें कि 2004-09 के बीच यूपीए के शासन काल में जब लालू प्रसाद यादव रेलमंत्री थे तब इसी तरह की एसी कोच लाने की कोशिश हुई थी। उसी समय गरीब रथ एक्सप्रेस ट्रेनें लॉन्च हुई थीं, जिन्हें एसी इकोनॉमी क्लास कहा गया। हालांकि, यात्रियों ने इसमें सफर के दौरान काफी परेशानी की शिकायत की थी। साथ ही ट्रेन में भीड़भाड़ की स्थिति भी पैदा होने लगी। जिसे देखते हुए बाद में इस तरह के कोच बनाने बंद कर दिए गए।

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