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अंबिकापुर:वन विभाग के चपरासी ने गिरोह बनाकर 21 गांवों में बांटा 12 सौ हेक्टेयर का फर्जी पट्टा; तीन गिरफ्तार

फर्जी वन पट्टा मामले में गिरफ्तार आरोपी, पुलिस की पूछताछ में और भी हो सकता है खुलासा।
  • BBC LIVE- फर्जी वनअधिकार पत्र के चल रहे खेल की खबर प्रकाशित होने के बाद पुलिस व तीन गिरफ्तार राजस्व विभाग ने शुरू की थी जांच
  • कलेक्टर, डीएफओ और कमिश्नर की सील बनाकर तैयार करते थे फर्जी पट्टा, सभी सामग्री जब्त
  • अफसरों ने बिना जांच के जारी कर दी ऋण पुस्तिका, 227 लोगों से गिरोह ने वसूले 13 लाख रुपए

बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर इलाके की 21 ग्राम पंचायतों में फर्जी वन अधिकार पट्टा जारी कर दिया गया। अब तक की जांच में इलाके में 227 लोगों को पट्टा जारी किया गया है और इनसे 13 लाख से अधिक की उगाही की गई है। एक गिरोह लंबे समय से फर्जी पट्टा बनाकर लोगों से वसूली कर रहा था। मामले में गिरोह के 3 सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। साथ ही पट्टा बनाने में उपयोग किए जा रहे प्रिंटर, कंप्यूटर और स्कैनर जब्त किए गए हैं। गिरोह में वन विभाग का एक कर्मचारी सरगना की भूमिका में था। गिरोह ने 12 सौ हेक्टेयर वन भूमि का पट्टा तैयार कर जारी कर दिया था। मामले के खुलासे के बाद पुलिस की जांच उन अधिकारियों की ओर बढ़ रही है, जिन्होंने फर्जी पट्टा की जांच किए बिना ऋण पुस्तिका जारी कर दिए हैं। दैनिक भास्कर ने इलाके में फर्जी वन अधिकार पत्र के चल रहे इस खेल को कुछ दिन पहले ही प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद पुलिस हरकत में आई और कलेक्टर बलरामपुर श्याम धावड़े और एसपी रामकृष्ण साहू के निर्देश पर पूरे मामले जांच शुरू की गई।

फर्जी पट्टा बनाने अफसरों के बना लिए थे सील मोहर
पुलिस के अनुसार आरोपियों से कंप्यूटर, स्कैनर, प्रिंटर के अलावा सील और पेन जब्त किया गया है। बताया गया है कि पंचम पटेल ने खुद ही कलेक्टर, आयुक्त और डीएफओ का सील मोहर तैयार किया है। मामले में राजस्व विभाग के अधिकारियों के खिलाफ भी जांच में कार्रवाई की जा सकती है। आरोप है कि अधिकारियों ने फर्जी पट्टे की जांच नहीं की और इसके बाद भी उन्हें ऋण पुस्तिका जारी कर दिया।

जिन ग्रामीणों ने बनवाया था फर्जी पट्‌टा, उन्होंने थाने में दी जानकारी
एसडीओपी धुर्वेश जायसवाल ने बताया कि वाड्रफनगर तहसीलदार ने इसकी रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद वन अधिकार का फर्जी पट्टा जारी करने की जांच शुरू की तो पता चला कि इसके पीछे एक बड़ा गिरोह काम कर रहा है। इलाके के जिन ग्रामीणों ने फर्जी पट्टा बनवाया था, उन्होंने इसकी जानकारी थाने में दी और सभी ने फर्जी पट्टा थाने में अधिकारी के सामने जमा किया। ग्रामीणों से पूछताछ में खुलासा हुआ कि बरतीकला और आसपास के लोग इसमें शामिल हैं।

इन गांवों में जारी किया फर्जी वन अधिकार पट्टा, 20 हजार की उगाही
आरोपियों ने वाड्रफनगर, त्रिकुंडा, रघुनाथनगर चौकी, बसंतपुर थाना इलाके के भारहीबांस, हरिगवा, बगाईनार, लंगड़ी, सरना, जनकपुर, बेतो, गिरवानी, शंकरपुर, बभनी, जेवराही, केसारी, करमड़ीहा, सरवत, गुरमुट्टी, लोधी, रामनगर, राजखेता, बरतिकला, ओदारी और गोवर्धनपुर के कुल 227 ग्रामीणों को पट्टा जारी कर इनसे लाखों रुपए की वसूली की हैं। इन गांवों के ग्रामीणों से पट्टा देने के एवज में 5 से 20 हजार तक उगाही की गई थी।

पट्टे के लिए खुद को ग्रामीणों ने 2 से 3 माह के लिए रख दिया था गिरवी
पीड़ितों ने बताया है कि जब उन्हें पता चला कि उनके काबिज भूमि का पट्टा 5-10 हजार में बन जा रहा है तो कई ग्रामीणों ने घर में पैसा नहीं होने के कारण 2 से 3 माह के लिए खुद को गिरवी रख दिया था। उन्हें इसके लिए मजदूरी कर पैसा चुकाना पड़ा। उन्हें इसके एवज में पैसे मिले, जिसे उन्होंने गिरोह के सदस्यों को दिया, तब उन्हें फर्जी पट्टा मिला था। कुछ ने पसीने की कमाई दे दी।

गिरोह में कई लोग शामिल
मामले में अभी कुछ और आरोपियों की गिरफ्तारी होनी है, लेकिन पुलिस उनके खिलाफ साक्ष्य जुटा रही है। तहसीलदार ने पहले कहा था दूसरे जिलों में भी इस तरह फर्जी पट्टा जारी किया गया होगा। पुलिस ने बरती निवासी बैजनाथ पांडे को गिरफ्तार किया। पांडे वन मंडल कार्यालय सूरजपुर में भृत्य के पद पर पदस्थ है। साथ ही गुरमुट्टी निवासी रामबृक्ष आयाम 55 वर्ष व रेवटी के सोनडीहा निवासी पंचम पटेल को गिरफ्तार किया है।

जांच कर रहे हैं, किसी भी आरोपियों का बख्शा नहीं जाएगा: एसपी साहू
“तहसीलदार की शिकायत के बाद पुलिस टीम ने विवेचना की और जांच के बाद 3 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। 227 फर्जी पट्टों को एसडीएम को जांच के लिए दिया जाएगा। मामले की जांच जारी है, जो भी और आरोपी होंगे, उन्हें भी नहीं बख्शा जाएगा।”
रामकृष्ण साहू, एसपी, बलरामपुर

मामले में यदि प्यून 24 घंटे जेल में रहा तो करेंगे सस्पेंड: डीएफओ
“मुझे हमारे ऑफिस का प्यून बैजनाथ पांडे फर्जी पट्टा गिरोह चलाने के मामले में गिरफ्तार किया गया है। इसकी जानकारी नहीं है। अगर वह 24 घंटे जेल में रहा तो सस्पेंड किया जाएगा। पुलिस ने सूचना नहीं दी है। वह तो ऑफिस में फाइल इस टेबल से उस टेबल ले जाने का काम करता था। 2-3 दिन से उसे देखा भी नहीं हूं।”
-जेआर भगत, डीएफओ, सूरजपुर​​​​​​​

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