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रघुवंश प्रसाद के RJD से इस्‍तीफे पर लालू यादव का खत, ‘आप कहीं नहीं जा रहे, समझ लीजिए..’

आरजेडी प्रमुख ने लिखा, ‘प्रिय रघुवंश बाबू,आपके द्वारा कथित तौर पर लिखी एक चिट्ठी मीडिया में चलाई जा रही है. मुझे तो विश्वास ही नहीं होता. अभी मेरे, मेरे परिवार और मेरे साथ मिलकर सिंचित राजद परिवार आपको शीघ्र स्वस्थ होकर अपने बीच देखना चाहता है.

  • रघुवंश प्रसाद का इस्‍तीफा लालू यादव की पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है

पटना : 

राष्‍ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) ने अपने खास सहयोगी रघुवंश प्रसाद सिंह (Raghuvansh Prasad Singh) के पार्टी के इस्‍तीफा देने को लेकर भावनाओं से भरा खत ल‍िखा है, इसमें में लालू ने लिखा है कि आप जल्‍द स्‍वस्‍थ हों, इसके बाद बैठकर बात (इस्‍तीफे के बारे में) करेंगे. लालू ने लिखा, ‘आप कहीं नहीं जा रहे हैं, समझ ली‍जिए.’ लालू का यह जवाब ‘रघुवंश बाबू’ के साथ उनकी आत्‍मीयता और मधुर संबंधों को बयानी करता है. आरजेडी प्रमुख ने लिखा, ‘प्रिय रघुवंश बाबू,आपके द्वारा कथित तौर पर लिखी एक चिट्ठी मीडिया में चलाई जा रही है. मुझे तो विश्वास ही नहीं होता. अभी मेरे, मेरे परिवार और मेरे साथ मिलकर सिंचित राजद परिवार आपको शीघ्र स्वस्थ होकर अपने बीच देखना चाहता है. चार दशकों में हमने हर राजनीतिक, सामाजिक और यहां तक कि पारिवारिक मामलों में मिल बैठकर ही विचार किया है. आप जल्द स्वस्थ हो, फिर बैठकर बात करेंगे.आप कहीं नहीं जा रहे है. समझ लीजिए….आपका लालू प्रसाद.’ बिहार में विधानसभा चुनाव के पहले रघुवंश बाबू का इस्‍तीफा लालू की पार्टी आरजेडी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.

'32 साल तक लेकिन अब नहीं..' बिहार चुनाव के पहले लालू यादव की पार्टी के शीर्ष नेता ने दिया इस्‍तीफा..गौरतलब है कि आरजेडी के वरिष्‍ठ नेता रघुवंश प्रसाद ने आख़िरकार आरजेडी से इस्तीफ़ा दे दिया. अपने हाथ से लिखे इस्तीफे के लेटर में रघुवंश बाबू ने पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष लालू यादव ने लिखा कि 32 सालों तक आपके पीछे खड़ा रहा लेकिन अभी नहीं. इस समय दिल्ली AIIMS में इलाज करा रहे रघुवंश ने लिखा कि पार्टी नेता, कार्यकर्र्ता और आमजनों ने मुझे बड़ा स्नेह दिया, मुझे क्षमा करे. इस पत्र के शब्दों को लेकर साफ है कि संभवत: रघुवंश अब अपने फ़ैसले पर पुनर्विचार नहीं करना चाहते और मान-मनोव्‍वल की कोई गुंजाइश नहीं बची हैं.

माना जा रहा है कि इस समय पार्टी का जिस तरह से संचालन किया जा रहा था, रघुवंश प्रसाद सिंह इससे खुश नहीं थे और इस बारे में उन्‍होंने साल की शुरूआत में लालू को लेटर भी लिखा था.लालू यादव को लिखे एक पत्र में रघुवंश प्रसाद सिंह ने पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र बहाल करने के अलावा पार्टी को और अधिक आक्रामक बनाने का सुझाव दिया था.

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