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पहली बार चरस के साथ तस्कर गिरफ्तार:गांजे के बाद अब चरस का बड़ा बाजार बन रहा ओडिशा क्योंकि ये सौ गुना ज्यादा महंगी

जगदलपुर
आरोपी से जब्त चरस।
  • कोंडागांव में 725 ग्राम चरस के साथ तस्कर गिरफ्तार, ओडिशा से रायपुर लेकर जा रहा था, कम मात्रा में चरस की तस्करी करने से तस्करों को गांजे के मुकाबले हो रहा ज्यादा फायदा

बस्तर संभाग में कोंडागांव पुलिस ने गुरुवार को एक चरस तस्कर को गिरफ्तार किया है इसके साथ ही कई बड़े खुलासे हुए हैं। जानकारी के अनुसार पता चला है कि अब ओडिशा में गांजा की खेती करने वाले बड़े गिरोह अब बड़ी मात्रा में चरस का उत्पादन भी कर रहे हैं। गांजे की खेती से चरस के उत्पादन के पीछे की वजह भी पुलिस का दबाव है। इसके साथ ही चरस गांजे से सौ गुना ज्यादा महंगी है। तस्करों को इसे कम मात्रा में भी ले जाने पर ज्यादा फायदा दिख रहा है। कम मात्रा होने से बाइक पर भी लेकर जा रहे हैं जिससे पकड़ाने का रिस्क कम होता है। यही कारण है कि अब ये तस्कर ओडिशा को चरस का बड़ा बाजार बना रहे हैं। दरअसल, हाल के कुछ सालों में बस्तर पुलिस ने गांजे की तस्करी पर ब्रेक लगाने कई अभियान चलाए और मुखबिरों का एक ऐसा नेटवर्क खड़ा किया है कि ओडिशा से गांजा निकलते ही इसकी सूचना पुलिस को मिल रही है। पिछले एक साल में पुलिस ने करीब 5 करोड़ रुपए से ज्यादा का गांजा और गाड़ियां जब्त की है। यही नहीं गांजा तस्करी के लिए बड़ी गाड़ियाें की जरूरत भी पड़ती है। ऐसे में अब वहां गांजा की खेती के साथ-साथ चरस भी निकाली जा रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार मुखबिरी के डर से अभी चरस के कारोबार को ओडिशा के ही उन स्थानीय युवकों के हाथों में रखा गया है जो गांजा की खेती से जुड़े हैं। ये युवक खुद ही महानगरों में चरस की सप्लाई कर रहे हैं। इसे ओडिशा से महानगरों तक पहुंचाने के लिए बड़ी गाड़ियों के बदले बाइक और सार्वजनिक आवागमन के साधनों का उपयोग किया जा रहा है। दरअसल एक किलो चरस साधारण से बैग में कपड़ों के नीचे बड़ी आसानी से आ जाता है और इसमें से गांजे के जैसी महक भी नहीं निकलती है। स्थानीय युवकों के ही हाथ में कारोबार रखने के पीछे की वजह यह है कि इससे मुखबिरी का खतरा बेहद कम हो जाता है और चरस की ठीक-ठाक कीमत भी मिल जाती है।

सौ करोड़ रुपए से ऊपर का सिर्फ गांजे का कारोबार, अब चरस भी निकाल रहे
इधर ओडिशा से निकलने वाले गांजे की देश के कई राज्यों में अच्छी खासी मांग है। खासतौर पर यूपी, बिहार, मध्यप्रदेश में इसे पंसद किया जाता है। अभी ओडिशा के एक किलो गांजा की कीमत 5 हजार रुपए है। इसके अलावा कली गांजा की कीमत 10 हजार रुपए प्रति किलो है। हर साल करीब सौ करोड़ रुपए से ज्यादा का अवैध कारोबार यहां चलता है। इसके अलावा अब गांजे के साथ यहां चरस का उत्पादन भी किया जा रहा है। जिसकी कीमत करीब 5 लाख रुपए प्रति किलो है। ऐसे में अब नशे का यहां कारोबार का टर्नओवर दोगुना होने की आंशका है। चरस गांजे के पेड़ से निकला हुआ एक प्रकार का गोंद या चेप है जो देखने में प्रायः मोम की तरह और हरे अथवा कुछ पीले रंग का होता है और जिसे लोग गांजे या तम्बाकू की तरह पीते हैं।

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