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शार्ली एब्दो को फिर अलकायदा की धमकी:फ्रांस की मैगजीन को फिर से पैगंबर मुहम्मद के कार्टून छापने पर हमले की धमकी, 2015 के आतंकी हमले में 12 लोगों की मौत हुई थी

पेरिस
शार्ली ऐब्दो के कार्टूनिस्ट किसी भी मुद्दे पर व्यंग करते हुए कार्टून छापते हैं।- फाइल पोटो
  • अलकायदा ने अपनी अंग्रेजी मैगजीन ‘वन उम्माह’ के जरिए धमकी दी
  • 2 सितंबर से शार्ली एब्दो पर हमले की कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई है

अलकायदा ने एक बार फिर फ्रांस की मैगजीन शार्ली एब्दो को हमले की धमकी दी है। दरअसल, शार्ली एब्दो ने हाल ही में दोबारा पैगंबर मुहम्मद से जुड़े कार्टून छापे हैं। ये वही कार्टून हैं, जिनकी वजह से 2015 में उस पर आतंकी हमला हुआ। शार्ली एब्दो के कार्टूनिस्ट व्यंग करते हुए विभिन्न धर्मों की कमियां दिखाते हैं। वे पहले ईसाई, यहूदी के भी कार्टून छाप चुके हैं। हालांकि, इस्लाम धर्म से जुड़े कार्टून छापने पर उन पर आतंकी हमला हो गया था।

अलकायदा ने अमेरिका में 9/11 हमले के 19 साल पूरे होने पर अपनी अंग्रेजी मैगजीन ‘वन उम्माह’ छापी है। इसके जरिए उसने चेतावनी दी कि शार्ली एब्दो अगर मानता है कि उस पर केवल एक बार ही हमला होगा तो यह उसकी गलती है। इसमें कहा गया- फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मैगजीन को कार्टून छापने के लिए हरी झंडी दी है। मैक्रों को हम वही मैसेज देना चाहते हैं, जो उनसे पहले पहले के राष्ट्रपति फ्रैंकोइस हॉलैंड को दिया था।

2 सितंबर से शुरू हुई है हमले की सुनवाई
दरअसल, 2 सितंबर से शार्ली एब्दो पर हमले की सुनवाई शुरू हुई है। इसमें हमले में शामिल आतंकियों की मदद करने के आरोपी 14 लोगों पर मुकदमा चलेगा। शार्ली एब्दो ने सुनवाई के पहले पैगंबर मुहम्मद के कार्टून 1 सितंबर को ऑनलाइन वर्जन और 2 सितंबर के प्रिंट एडिशन में छापे थे।

2015 के हमले में 12 लोग मारे गए थे
फ्रांस की इस मैगजीन के हेडऑफिस पर 7 जनवरी 2015 में आतंकी हमला हुआ था। यह हमला अलकायदा की यमन ब्रांच ने किया था। वजह मैगजीन का पैगंबर मुहम्मद और इस्लाम से जुड़े कार्टून छापना था। इस हमले में फ्रांस के मशहूर कार्टूनिस्टों समेत 12 लोगों की जान गई थी।

मैगजीन के डायरेक्टर ने क्या कहा?
शार्ली एब्दो के डायरेक्टर लॉरेंट सॉरीसेऊ ने कहा है कि उन्हें फिर से कार्टून छापने से कोई अफसोस नहीं है। 2015 में हमले के दौरान लॉरेंट भी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। कोर्ट में सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा- अफसोस इस बात का है कि आजादी की रक्षा के लिए कितने कम लोग लड़ते हैं। यदि हम अपनी स्वतंत्रता के लिए नहीं लड़ते तो हम एक गुलाम की तरह रहते हैं और एक घातक विचारधारा को बढ़ावा देते हैं। कार्टून को दोबारा छापने पर उन्होंने कहा- सुनवाई की शुरुआत के मौके पर अगर वे यह कार्टून नहीं छापते तो यह साबित होता कि उन्होंने पहले कार्टून छापकर गलती की थी।

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