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दमोह उपचुनाव: हार के बाद भाजपा ने छह सदस्यों को निलंबित किया, पूर्व मंत्री को कारण बताओ नोटिस

मध्य प्रदेश की दमोह विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में हार के बाद भाजपा प्रत्याशी राहुल सिंह लोधी ने पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री जयंत मलैया को ज़िम्मेदार ठहराया था. भाजपा ने मलैया को कारण बताओ नोटिस भेजते हुए उनके बेटे और पांच मंडल अध्यक्षों को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया है.

भोपाल: मध्य प्रदेश की दमोह विधानसभा उपचुनाव में पार्टी प्रत्याशी की हार के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में वरिष्ठ पार्टी नेता एवं प्रदेश के पूर्व मंत्री जयंत मलैया को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और उनके बेटे सिद्धार्थ मलैया एवं पांच मंडल अध्यक्षों को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया है.

भाजपा प्रत्याशी राहुल सिंह लोधी ने इस सीट पर अपनी हार के लिए सीधे तौर पर दमोह के वरिष्ठ भाजपा नेता जयंत मलैया (74) एवं उनके परिवार को जिम्मेदार ठहराया था और उनको पार्टी से निष्कासित करने की मांग की थी.

उल्लेखनीय है कि दमोह विधानसभा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी अजय टंडन ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी सत्तारूढ़ भाजपा के उम्मीदवार राहुल सिंह लोधी को 17,097 मतों से हराया है और इस सीट पर पार्टी की जीत बरकरार रखी.

मध्य प्रदेश भाजपा के मीडिया प्रभारी लोकेन्द्र पाराशर ने शनिवार को बताया, ‘दमोह विधानसभा उपचुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों में भाग लेने के कारण प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने दमोह जिले के अपने पांच मंडल अध्यक्षों अभाना मंडल के अजय सिंह, दीनदयाल नगर मंडल के संतोष रोहित, दमयंती मंडल के मनीष तिवारी, बांदकपुर मंडल के अभिलाष हजारी और बॉसा मंडल के देवेंद्र सिंह राजपूत तथा प्रशिक्षण प्रकोष्ठ के जिला संयोजक सिद्धार्थ मलैया को शुक्रवार रात को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया है.’

सिद्धार्थ मलैया भाजपा के वरिष्ठ नेता जयंत मलैया के बेटे हैं और इस सीट पर टिकट की दावेदारी कर रहे थे. हालांकि, उन्हें भाजपा का टिकट नहीं मिल पाया था.

पाराशर ने बताया, ‘भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा के निर्देशानुसार की गई इस कार्रवाई के साथ-साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता जयंत मलैया को भी दमोह विधानसभा उपचुनाव के दौरान पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है.’

जयंत मलैया पूर्व में दमोह विधानसभा सीट से विधायक रह चुके हैं. दमोह विधानसभा उपचुनाव के लिए 17 अप्रैल को मतदान हुआ था और दो मई को इसके परिणाम आए थे.

इससे पहले लोधी ने उपचुनाव हारने के बाद दो मई को देर रात मीडिया से बात  करते हुए कहा था, ‘दमोह के वरिष्ठ भाजपा नेता एवं मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री जयंत मलैया तथा उनके परिवार के कारण मैं चुनाव हारा हूं.’

उन्होंने कहा था, ‘मलैया 35 वर्षों से राजनीति कर रहे हैं और मैं उनके ही वॉर्ड में हार गया. इस वॉर्ड को हम कभी नहीं हारे थे. उन्हें बताना चाहिए कि मैं उनका वॉर्ड कैसे हारा? मलैया को शहरी क्षेत्र की जिम्मेदारी दी थी तो शहरी क्षेत्र में कैसे हारे?’

लोधी का कहना था, ‘मैं तो खुले रूप से आरोप लगाता हूं कि मलैया परिवार की पूरी रणनीति सफल हुई, और भाजपा दमोह से हारी. मैं तो स्पष्ट कहता हूं और मांग करता हूं कि ऐसे लोगों को पार्टी से निष्कासित करना चाहिए.’

लोधी ने कांग्रेस की टिकट पर वर्ष 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा के जयंत मलैया को दमोह सीट से हराया था. लेकिन पिछले साल अक्टूबर में उन्होंने विधायक पद इस्तीफा दे दिया था और बाद में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे.

इसी के चलते यह सीट खाली हो गई थी और इस उपचुनाव में वह भाजपा की टिकट पर लड़े थे.

उपचुनाव के नतीजे आने के बाद सोमवार को प्रदेश के भाजपा नेता एवं केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल तथा राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भाजपा की हार के लिए पार्टी की अंदरूनी षड्यंत्रकारियों को जिम्मेदार ठहराया था.

मिश्रा ने  कहते हुए कि दमोह की जीत पर मध्य प्रदेश कांग्रेस ज्यादा ख़ुशी नहीं मनाए, ट्वीट किया था, ‘दमोह नहीं हारे हैं हम, छले गए छलछंदों से. इस बार लड़ाई हारे हैं हम, अपने घर के जयचंदों से.’

मिश्रा ने कहा था कि मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को पूरे देश में कांग्रेस का जो सफाया हुआ है, उस पर भी चिंतन करना चाहिए.

वहीं, केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल ने ट्वीट किया था, ‘दमोह चुनाव परिणाम ने भविष्य की चुनौतियों, षड्यंत्रों और कार्यप्रणाली में सुधार के स्पष्ट संकेत दिए हैं. हम सभी कार्यकर्ता अपनी परिश्रम की मूलसामर्थ्य और विद्वेषरहित कार्यप्रणाली से इनका समाधान खोजेंगे.’

दमोह जिले के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक का तबादला

उपचुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा प्रत्याशी राहुल सिंह लोधी की करारी हार के पांच दिन बाद प्रदेश सरकार ने दमोह जिले के कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक का तबादला कर दिया है.

मध्य प्रदेश कांग्रेस ने सरकार के इस निर्णय को अचंभित व हैरान करने वाला बताया है.

मध्य प्रदेश सामान्य प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार दमोह जिले के कलेक्टर तरुण राठी का तबादला कर पहले जबलपुर जिले के अपर कलेक्टर अनूप कुमार सिंह को दमोह जिले का कलेक्टर बनाया गया. लेकिन इस आदेश के चंद ही घंटों बाद उसी दिन नया आदेश जारी कर अनूप कुमार सिंह का तबादला निरस्त कर उन्हें अपने पहले पद जबलपुर जिले के अपर कलेक्टर पर यथावत कर दिया गया और इंदौर नगर निगम के अपर आयुक्त एस कृष्ण चैतन्य को दमोह जिले का कलेक्टर बना दिया गया.

तरुण राठी को अब उप सचिव, मध्य प्रदेश शासन की जिम्मेदारी दी गई है.

इसी तरह से मध्य प्रदेश गृह विभाग द्वारा शुक्रवार को जारी आदेश के अनुसार दमोह जिले के पुलिस अधीक्षक हेमंत चौहान का स्थानांतरण सहायक पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस मुख्यालय भोपाल में कर दिया गया है और उनके स्थान पर डीआर तेनीवार को दमोह जिले का पुलिस अधीक्षक बनाया गया है.

हालांकि, आदेश में दमोह जिले के कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक के तबादले के बारे में कोई कारण नहीं लिखा गया है. दमोह के नये कलेक्टर चैतन्य ने शनिवार शाम को अपना प्रभार भी संभाल लिया है.

राठी के अलावा, रतलाम कलेक्टर गोपाल चंद्र डाड का भी स्थानांतरण कर अपर सचिव, मध्य प्रदेश शासन बनाया गया है और उनके स्थान पर गुना जिले के कलेक्टर कुमार पुरूषोत्तम को रतलाम का कलेक्टर बनाया गया है.

सूत्रों के अनुसार डाड को रतलाम जिले में कोरोना वायरस संक्रमण दर को रोकने में कथित रूप से असफल होने के लिए हटाया गया है.

वहीं, बालाघाट जिले के अपर कलेक्टर फ्रेंक नोबल का तबादला कर गुना जिले का कलेक्टर बनाया गया है.

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शनिवार को अपने एक बयान में दमोह उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी की हार के बाद दमोह के जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के तबादले पर सवाल उठाते हुए इस निर्णय को अचंभित व हैरान करने वाला बताया है.

उन्होंने कहा कि शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली प्रदेश की भाजपा नीत सरकार के इस कृत्य से एक सवाल उठता है कि क्या भाजपा ने दमोह में चुनाव जिताने की जिम्मेदारी वहाँ के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को सौंपी थी?

कमलनाथ ने बताया कि यदि दमोह जिले के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने अपने कर्त्तव्यों के निर्वहन और अपनी वर्दी का सम्मान करते हुए निष्पक्ष चुनाव कराये तो क्या सरकार उन्हें इस कर्तव्यपरायणता की सजा देगी?

उन्होंने कहा, ‘साफ नजर आ रहा है कि भाजपा प्रशासन का दुरूपयोग कर चुनाव जीतना चाहती थी, और अपने इस नापाक मंसूबे में असफल होने के बाद अब प्रशासनिक अधिकारियों में आतंक पैदा करने के लिये कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक को हटाया गया है.’

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