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बिलासपुर के कोटा वन रेंज में रात के अंधेरे में करंट लगाकर शिकार; वन विभाग ने 9 लोगों को किया गिरफ्तार, तीन आरोपी फरार

बिलासपुर जिले के कोटा वन रेंज में वन्य प्राणियों का शिकार किया गया है। पता चला है कि गुरुवार रात को आरोपियों ने नगचुंवा गांव के पास 2 जंगली सुअर का शिकार किया है। जिसकी सूचना पर कोटा वन रेंज और ATR (अचानकमार टाइगर रिजर्व) की टीम ने देर रात ही 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जबकि 3 आरोपी टीम को देखकर भाग निकले। पुलिस ने आरोपियों से शिकार में इस्तेमाल सामान बरामद किया है।

आरोपियों में 3 खरीदार और 6 शिकारी

दरअसल, कोटा वन रेंज और ATR की टीम को सूचना मिली थी कि नगचुंवा गांव के पास कुछ शिकारी सक्रिय हैं। जो वन्य जीवों के शिकार के फिराक में हैं। इस बीच देर रात ही यह सूचना आई की शिकारियों ने करंट लगाकर से दो जंगली सुअर को शिकार किया है। जिस पर टीम ने मौके पर दबिश दी और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। वहीं 3 आरोपी टीम को देखकर भाग गए। तीनों आरोपियों की तलाश की जा रही है। आरोपियों में 6 शिकारी और 3 खरीदार शामिल हैं। टीम ने आरोपियों से शिकार में इस्तेमाल तार और अन्य सामान बरामद किया है।

इस तरह का मामले पहले भी आए सामने

कोटा वन रेंज और ATR रेंज आपस में लगे हुए हैं और यहां इससे पहले भी जंगली जानवारों के शिकार के मामले सामने आए हैं। अभी कुछ दिन पहले ही कोटा पुलिस ने रतनपुर रोड जानवर के मांस के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार किया था। हालांकि वन विभाग इस बात की पुष्टि अब तक नहीं कर सकी है कि आखिर मांस किस जानवर का था। वहीं ATR रेंज में ही मुंगेली जिले के लोरमी इलाके से 28 मार्च को भी जंगल जानवरों के शिकार मामले में 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। जिसमें एक आरोपी ATR के ही बीट गार्ड का बेटा था। उस दौरान आरोपियों से चीतल समेत कई जंगली जानवरों का मांस बरामद हुआ था।

अचानकमार टाइगर रिजर्व क्या है?

अचानकमार अभ्यारण्य की स्थापना 1975 में की गई थी। 2007 में इसे बायोस्फीयर घोषित किया गया और 2009 में बाघों की बढ़ती संख्या के चलते अचानकमार अभ्यारण्य को टाइगर रिजर्व क्षेत्र घोषित कर दिया गया था। अचानकमार टाइगर रिजर्व की गिनती देश के 39 टाइगर रिजर्व में होती है। यहां बाघ, तेंदुआ, गौर, उड़न गिलहरी, जंगली सुअर, बायसन, चिलीदार हिरण, भालू, लकड़बग्घा, सियार, चार सिंग वाले मृग, चिंकारा सहित बड़ी संख्या में जंगली जानवर हैंं। इसी के चलते शिकारी इनके शिकार के फिराक में रहते हैं।

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