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ब्लैक फंगस की घर बैठे छुट्टी:कानपुर के तीन होनहारों का कमाल, बेकिंग सोडा, नीम और लेमन ऑयल से बनाया हर्बल स्प्रे, CSIR-IITR की लैब में सफल टेस्टिंग

कानपुर
  • स्प्रे को घर पर ही बनाया जा सकता है। सबसे अच्छी बात यह है कि हर्बल है और इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है।

देश में कोरोना महामारी की दूसरी लहर अभी खत्म नहीं हुई है, ब्लैक और व्हाइट फंगस ने कहर बरपाना शुरु कर दिया है। कई वैज्ञानिकों ने दावा किया कि कोरोना वायरस और ब्लैक फंगस हवा के जरिए नाक और मुंह के जरिए शरीर में पहुंच सकता है। इन दावों के बीच उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक राहत भरी खबर आई है। कानपुर यूनिवर्सिटी के पीएचडी के छात्र, बरेली में बायोटेक्नोलॉजी के शिक्षक डॉक्टर सौरभ मिश्रा और माइक्रोबॉयोलॉजिस्ट डॉक्टर ऋषभ चित्रांशी ने मिलकर एक ऐसा स्प्रे तैयार किया है, जिससे फंगस को शरीर से नष्ट किया जा सकता है। इसे बनाना भी आसान है।

CSIR-IITR लखनऊ की लैब में हुआ सफल परीक्षण
स्प्रे को बनाने के बाद उसका पहले कानपुर यूनिवर्सिटी की लैब में परीक्षण किया गया। परिणाम उत्साह बढ़ाने वाले थे। इसके बाद मानकों पर खरा उतारने के लिए CSIR-IITR (काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंड्रस्ट्रियल रिसर्च, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टॉक्सीलोजी एंड रिसर्च) लखनऊ के लैब में परीक्षण किया गया।

घर में इस तरह बन सकता है स्प्रे

डॉक्टर सौरभ मिश्रा कहते हैं कि कोरोना मरीज के आसपास इसका छिड़काव किया जाए तो ब्लैक फंगस के संक्रमण से बचा जा सकता है।
डॉक्टर सौरभ मिश्रा कहते हैं कि कोरोना मरीज के आसपास इसका छिड़काव किया जाए तो ब्लैक फंगस के संक्रमण से बचा जा सकता है।

डॉ. सौरभ मिश्रा ने बताया कि इस स्प्रे को घर पर भी बनाया जा सकता है। एक ग्राम बेकिंग सोडा को 400 मिली पानी में मिलाएं। फिर 20 से 25 बूंद नीम ऑयल और एक मिली लेमन ऑयल को मिलाकर इसका मिक्सचर तैयार करें। इस तरह आसानी से स्प्रे को घर पर ही बनाया जा सकता है। सबसे अच्छी बात यह है कि हर्बल है और इसका कोई साइड इफेक्ट नहीं है।

डॉ. सौरभ ने आगे बताया कि हम लोगों ने इस स्प्रे का इस्तेमाल पपीते और रोटी के ऊपर लगी ब्लैक फंगस पर किया। दो दिन लगातार इसको स्प्रे करने के बाद ब्लैक फंगस की परत की सिर्फ ग्रोथ नहीं रुकी बल्कि वह पूरी तरह नष्ट भी हो गई। अगर इस स्प्रे का प्रयोग हम कोविड मरीज के कमरे में व उसके आसपास प्रयोग हो रहे उपकरणों पर छिड़काव करें तो ब्लैक फंगस के संक्रमण से मरीज को बचाया जा सकता है।

क्या होता है ब्लैक और व्हाइट फंगस
कोरोना संक्रमण से उबरे मरीजों में ज्यादातर ब्लैक फंगस के मामले मिलते हैं। बीमारी आंखों पर असर करती है। इस संक्रमण के मामले काफी दुर्लभ होते हैं। हमारे वातावरण में ये फंगस हमेशा मौजूद रहती है और ये कमजोर इम्युनिटी वालों को शिकार बनाते हैं। यूएस सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, ब्लैग फंगस एक दुर्लभ फंगल संक्रमण है। यह आमतौर पर आंखों और मस्तिष्क या स्किन के कट जाने, जलने या फिर स्किन की चोट के बाद भी फंगल संक्रमण हो सकता है।

UP में ब्लैक फंगस के 400 से ज्यादा रोगी
उत्तर प्रदेश में ब्लैक फंगस का कहर बढ़ता जा रहा है। मरीजों का आंकड़ा 600 के पार हो गया है। अब तक 48 से ज्यादा मरीजों की मौत हो चुकी है। पिछले 24 घंटे के अंदर इंजेक्शन और दवा न मिलने से मेरठ में 5 मरीजों की मौत हो गई। सबसे चिंता की बात ये है कि ब्लैक फंगस के इलाज में यूज होने वाली दवाइयों और इंजेक्शन का संकट बरकरार है। अस्पतालों में भी ये दवाइयां और इंजेक्शन नहीं हैं और ओपन मार्केट में भी नहीं मिल रहीं।

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