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पेट्रोल-डीज़ल के दामों में बढ़ोतरी के ख़िलाफ़ वाम दलों ने 15 दिन के विरोध-प्रदर्शन की घोषणा की

चार मई के बाद पेट्रोलियम उत्पादों के दामों में 23 बार वृद्धि हो चुकी है और सात राज्यों में पेट्रोल की क़ीमत 100 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच चुकी है. शुक्रवार को कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पेट्रोल एवं डीज़ल के दामों में वृद्धि के विरोध में दिल्ली समेत कई राज्यों में विभिन्न पेट्रोल पंपों के पास सांकेतिक प्रदर्शन किया था.

नई दिल्ली: पेट्रोल-डीजल के दामों में हुई भारी वृद्धि वापस लेने और पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग करते हुए देशभर के पेट्रोल पंपों के पास कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा शुक्रवार को विरोध किए जाने के बाद अब वाम दलों ने 15 दिन तक विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है.

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, वाम दलों ने ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को वापस लेने और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने की मांग को लेकर 16 से 30 जून तक 15 दिनों के विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है.

पांच वाम दलों के महासचिवों- माकपा के सीताराम येचुरी, भाकपा के डी. राजा, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के देवव्रत विश्वास, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के मनोज भट्टाचार्य और भाकपा-माले पार्टी के दीपांकर भट्टाचार्य द्वारा हस्ताक्षरित एक संयुक्त बयान में बताया गया कि हाल ही में 2 मई को हुए विधानसभा चुनावों के नतीजे घोषित होने के बाद से पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें 21 गुना बढ़ गई हैं.

वाम दलों ने कहा, ‘यह थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) के 11 साल के उच्च स्तर पर पहुंचने के साथ एक मुद्रास्फीति में एक व्यापक अंतर की ओर ले जा रहा है. खाद्य पदार्थों की कीमतों में अप्रैल में लगभग 5 फीसदी की वृद्धि हुई है. प्राथमिक वस्तुओं में 10.16 फीसदी और विनिर्मित उत्पादों में 9.01 फीसदी की वृद्धि देखी गई. जब तक ये वस्तुएं खुदरा बाजारों में पहुंचती हैं, तब तक उपभोक्ताओं से बहुत अधिक शुल्क लिया जाता है.’

वाम दलों ने कहा कि अर्थव्यवस्था गहरी मंदी के दौर से गुजर रही है. उन्होंने कहा, ‘जाहिर है राज्य के संरक्षण में बेइमानी से कालाबाजारी और जमाखोरी हो रही है. मोदी सरकार को इस तरह की कालाबाजारी पर सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए, विशेष रूप से आवश्यक दवाओं की, जो लोगों के अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण है.’

पार्टियों ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दीपावली तक पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना को 5 किलोग्राम खाद्यान्न तक बढ़ाने की घोषणा पूरी तरह से अपर्याप्त थी. इसके बजाय, सभी व्यक्तियों को प्रति माह 10 किलो खाद्यान्न, जिसमें दाल, खाद्य तेल, चीनी, मसाले, चाय आदि के साथ एक खाद्य किट शामिल है, मुफ्त वितरित किया जाना चाहिए.

संयुक्त बयान में कहा गया, ‘मोदी सरकार को आयकर भुगतान वर्ग में नहीं आने वाले सभी परिवारों को छह महीने के लिए प्रति माह ₹ 7,500 का प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण तुरंत देना चाहिए.’

बता दें कि, इससे पहले कांग्रेस ने भी ईंधन वृद्धि के खिलाफ देश भर के पेट्रोल पंपों पर एक दिवसीय विरोध प्रदर्शन किया था.

दरअसल, कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पेट्रोल एवं डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के विरोध में शुक्रवार को दिल्ली तथा देश के दूसरे राज्यों के अलग-अलग इलाकों में विभिन्न पेट्रोल पंपों के निकट सांकेतिक प्रदर्शन किया था तथा वृद्धि वापस लेने और पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने की मांग की थी.

दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और देश के अन्य राज्यों में भी प्रदेश कांग्रेस कमेटी तथा पार्टी के फ्रंटल संगठनों ने पेट्रोल पंपों के निकट सांकेतिक प्रदर्शन किया था.

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और कई अन्य वरिष्ठ नेताओं ने केंद्र सरकार पर महामारी के समय पेट्रोल-डीजल पर कर बढ़ाकर जनता के साथ ‘लूट’ का आरोप लगाया.

राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘जीडीपी गिर रही है. बेरोजगारी बेतहाशा बढ़ रही है. ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं. आखिर भाजपा कितने तरीके से भारत को लूटेगी?’

प्रियंका गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए दावा किया, ‘महामारी के दौरान मोदी सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर कर वसूले: पूरे 2.74 लाख करोड़ रुपये. इस पैसे से पूरे भारत को टीका (67000 करोड़ रुपये), 718 जिलों में ऑक्सीजन संयंत्र, 29 राज्यों में एम्स की स्थापना और 25 करोड़ गरीबों को छह-छह हजार रूपये की मदद मिल सकती थी. मगर मिला कुछ भी नहीं.’

कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और वरिष्ठ नेता शक्ति सिंह गोहिल घोड़ा-गाड़ी पर सवार होकर फिरोज शाह कोटला स्टेडियम के निकट पेट्रोल पंप पहुंचे.

वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस की अगुवाई वाली तत्कालीन संप्रग सरकार के कार्यकाल में पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय कर 9.20 रुपये था, लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार में इसके बढ़ाकर 32 रुपये कर दिया गया है.

कांग्रेस महासचिव अजय माकन ने राजेंद्र नगर और जनपथ में पेट्रोप पंपों के निकट विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया. उन्होंने भी विरोध स्वरूप घोड़ा-गाड़ी की सवारी की.

हालांकि, शुक्रवार को ही भाजपा ने कहा था कि जिन राज्यों में विपक्षी दलों की सरकारें हैं वहां कांग्रेस को मूल्य वर्धित कर (वैट) कम कर जनता को पेट्रोल और डीजल की बढ़ी हुई कीमतों से राहत देनी चाहिए.

चार मई के बाद पेट्रोलियम उत्पादों के दामों में 23 बार वृद्धि, सात राज्यों में पेट्रोल 100 के पार

कच्चे तेल के वैश्विक बाजार में तेजी के बीच सरकारी पेट्रालियम विपणन कंपनियों ने शनिवार को पेट्रोल के भाव में प्रति लीटर 27 पैसे और डीजल में 23 पैसे की वृद्धि की.

गत चार मई के बाद पेट्रोलियम उत्पादों के दामों में 23 बार वृद्धि की गई है जिससे राजस्थान में डीजल 100 रुपये/लीटर और कर्नाटक में पेट्रोल का भाव भी 100 रुपये/लीटर पर पहुंच गया है.

कर्नाटक ऐसा सातवां राज्य हो गया है जहां पेट्रोल का भाव 100 रुपये को छू गया है या उससे ऊपर पहुंच गया है. विभिन्न राज्यों में वैट और स्थानीय करों की विभिन्नता के कारण पेट्रोलियम उत्पादों के स्थानीय भाव अलग-अलग होते हैं.

स्थानीय करों मसलन मूल्य वर्धित कर (वैट) तथा ढुलाई भाड़े की वजह से विभिन्न राज्यों में ईंधन के दाम भिन्न-भिन्न होते हैं.

दिल्ली में पेट्रोल 96.12 रुपये/लीटर और डीजल का भाव 86.98 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है.

राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध प्रदेश, तेलंगाना और केंद्र शासित लद्दाख में पेट्रोल के खुदरा भाव पहले ही 100 रुपये या उससे से ऊपर पहुंच गए थे. इस सूची में शनिवार को कर्नाटक भी जुड़ गया.

कर्नाटक में बीदर, बेल्लारी, कप्पल, दावणगिरि, शिमोगा और चिकमंगलूर में पेट्रोल 100 रुपये से ऊपर की दर से बिक रहा है. बेंगलुरु में पेट्रोल का भाव 99.39 और डीजल 92.27 रुपये प्रति लीटर है.

राजस्थान के श्रीगंगानगर में पेट्रोल देश में सबसे ऊंची दर पर बिक रहा है. वहां पेट्रोल का भाव 107.22 और डीजल 100.05 के भाव मिल रहा है. वहां प्रीमियम पेट्रोल की दर 110.50 और प्रीमियम डीजल की दर 103.72 रुपये प्रति लीटर है. राजस्थान में वैट की दर सबसे ऊंची है.

मुंबई में पेट्रोल और डीजल के भाव 102.30 रुपये और 94.39 रुपये प्रति लीटर है.

देश में राजस्थान पेट्रोल और डीजल पर सबसे अधिक वैट लगाता है. उसके बाद मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना का नंबर आता है. मुंबई देश का पहला महानगर है, जहां 29 मई को पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर के ऊपर पहुंचा था.

चार मई के बाद 23 बार की बढ़ोतरी में पेट्रोल 5.72 रुपये और डीजल 6.25 रुपये महंगा हो चुका है.

समाचार एजेंसी आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि, रविवार को पेट्रोल-डीजल के दामों में कोई परिवर्तन नहीं हुआ.

वैश्विक बाजार में पिछली कुछ सप्ताह से कच्चे तेल का भाव फिर चढ़ने लगा है. बाजार को उम्मीद है कि कोविड-19 का टीकाकरण तेज होने से आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी और मांग बढ़ेगी.

बता दें कि भारतीय ईंधन की कीमतें पिछले एक साल में काफी बढ़ गई हैं, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रशासन ने सार्वजनिक वित्त को मजबूती प्रदान करने के लिए बार-बार बिक्री कर में बढ़ोतरी की है. कर अब खुदरा मूल्य का लगभग 60 प्रतिशत हो गए हैं और पेट्रोल तथा डीजल पर संघीय कर 2013 के बाद से लगभग छह गुना बढ़ गए हैं.

मालूम हो कि पेट्रोल और डीजल के दाम में एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और अन्य चीजें जोड़ने के बाद इसका दाम लगभग दोगुना हो जाता है. इन्हीं मानकों के आधार पर पेट्रोल और डीजल के दाम रोज तय करने का काम तेल कंपनियां करती हैं.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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