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असम: एनआईए अदालत ने अखिल गोगोई को दो में से एक यूएपीए मामले में बरी किया

असम के शिवसागर के विधायक अखिल गोगोई को फिलहाल जेल में ही रहना होगा क्योंकि यूएपीए के दूसरे मामले में उनके ख़िलाफ़ सुनवाई अभी चल रही है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने राज्य में हिंसक सीएए विरोधी प्रदर्शनों में कथित संलिप्तता के मामले में 2019 में उन्हें गिरफ़्तार किया था.

गुवाहाटी: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की अदालत ने असम में संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन मामले में शिवसागर के विधायक अखिल गोगोई के खिलाफ गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम)अधिनियम 1967 (यूएपीए) के तहत दर्ज दो मामलों में से एक में उन्हें आरोपों से बरी कर दिया है.

विशेष एनआईए न्यायाधीश प्रांजल दास ने गोगोई के खिलाफ आरोप तय नहीं किए. गोगोई को दिसंबर 2019 में चाबुआ पुलिस थाने में दर्ज मामले में गिरफ्तार किया गया था.

अदालत ने गोगोई के दो सहयोगियों- जगजीत गोहेन एवं भूपेन गोगोई- को भी मामले में गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के सभी आरोपों से बरी कर दिया.

रायजोर दल के अध्यक्ष गोगोई को चाबुआ पुलिस थाने में दर्ज मूल मामले में इससे पहले जमानत मिल गयी थी. यह मामला बाद में एनआईए को सौंप दिया गया था.

रिपोर्ट के अनुसार, नागरिकता संशोधन विरोधी प्रदर्शन के दौरान ऊपरी असम के कई पुलिस स्टेशनों में गोगोई के खिलाफ कुल 12 मामले दर्ज कराए गए थे.

उनमें से गोगोई के खिलाफ दो मामलों की जांच एनआईए कर रहा है, जो शुरुआत में चांदमारी एवं चाबुआ पुलिस थानों में दर्ज कराए गए थे. यह मामला हिंसक प्रदर्शन में गोगोई एवं उसके तीन अन्य साथियों की कथित भूमिका के लिये दर्ज किया गया था.

गोगोई के तीसरे सहयोगी भास्करज्योति फुकन के खिलाफ आरोप तय किए गए, लेकिन ये आरोप यूएपीए के तहत नहीं बल्कि भारतीय दंड संहिता की धारा 144 (घातक हथियारों से लैस होकर गैर कानूनी तरीके से एकत्रित होना) के तहत तय किए गए हैं. इस मामले को डिब्रूगढ़ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में स्थानांतरित कर दिया गया है.

एनआईए अदालत ने मंगलवार को चांदमारी थाने के उस मामले में भी सुनवाई की जो जांच एजेंसी को स्थानांतरित किया गया था.

चांदमारी पुलिस थाने में दर्ज मामले में अदालत ने पिछले साल अगस्त में उसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी, इसके बाद उसने इस फैसले को गुवाहाटी हाईकोर्ट में चुनौती दी है.

हाईकोर्ट में जमानत की अर्जी खारिज हो जाने के बाद गोगोई ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर इस अर्जी पर विचार करने से इनकार कर दिया.

गोगोई को 12 दिसंबर 2019 को जोरहाट से गिरफ्तार किया गया था. उस दौरान प्रदेश में संशोधित नागरिकता अधिनियम का विरोध पूरे जोरों पर था. गोगोई की गिरफ्तारी कानून व्यवस्था के मद्देनजर एहतियात के तौर पर हुयी थी और इसके अगले दिन उसके तीन सहयोगियों को हिरासत में लिया गया था.

बीते दिनों हुए विधानसभा चुनाव में नव गठित रायजोर दल के संस्थापक अखिल गोगोई निर्दलीय के तौर पर उतरे गोगोई को 57,219 वोट मिले थे. वे राज्य में जेल से चुनाव जीतने वाले पहले व्यक्ति हैं.

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