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पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने योगी आदित्यनाथ के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ने की घोषणा की

अब्दुल सलाम कादरी

भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने कार्यकाल में तमाम अलोकतांत्रिक, अराजक, दमनकारी, उत्पीड़नात्मक तथा विभेदकारी कार्य किए, वह इनके विरोध में उनके ख़िलाफ़ चुनाव लड़ेंगे. ठाकुर को गृह मंत्रालय के निर्णय के अनुपालन में गत 23 मार्च को समय-पूर्व सेवानिवृत्ति दे दी गई थी.

लखनऊ: भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने शनिवार को कहा कि वह उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ खड़े होंगे.

उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को समय-पूर्व सेवानिवृत्त कर दिया गया था.

ठाकुर ने शनिवार को जारी एक बयान में कहा कि वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विरुद्ध आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेंगे.

उन्होंने कहा, ‘आदित्यनाथ ने अपने कार्यकाल में तमाम अलोकतांत्रिक, अराजक, दमनकारी, उत्पीड़नात्मक तथा विभेदकारी कार्य किए, वह इनके विरोध में मुख्यमंत्री के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे, फिर चाहे आदित्यनाथ जहां से भी चुनाव लड़ें.’

ठाकुर ने कहा कि यह उनके लिए सिद्धांतों की लड़ाई है, जिसमें वह गलत के खिलाफ अपना विरोध व्यक्त करेंगे.

उन्हें गृह मंत्रालय के निर्णय के अनुपालन में गत 23 मार्च को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई थी.

केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक आदेश में कहा गया था कि ठाकुर को उनकी सेवा के शेष कार्यकाल के लिए बनाए रखने के लिए उपयुक्त नहीं पाया गया.

इसमें कहा गया था, ‘जनहित में अमिताभ ठाकुर को उनकी सेवा पूरी होने से पहले तत्काल प्रभाव से समय से पहले सेवानिवृत्ति दी जा रही है.’

मालूम हो कि बीते मई महीने में ठाकुर ने आरोप लगाया था कि उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें दी गई अनिवार्य सेवानिवृति से संबंधित दस्तावेज देने से मना कर दिया है.

ठाकुर ने कहा था कि सरकार द्वारा मनमाने ढंग से उन्हें सेवा से निकाला जाना तथा अब उनकी जीविका से संबंधित सूचना भी नहीं देना अत्यंत दुखद है तथा सरकार की गलत मंशा को दिखाता है.

साल 2017 में ठाकुर ने केंद्र से अपना कैडर राज्य बदलने का आग्रह किया था.

सपा संरक्षक मुलायम सिंह पर धमकी देने का आरोप लगाने के कुछ दिनों बाद 13 जुलाई, 2015 को ठाकुर को निलंबित कर दिया गया था. उसके खिलाफ विजिलेंस जांच भी शुरू कर दी गई थी.

हालांकि, सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल की लखनऊ पीठ ने अप्रैल 2016 में उनके निलंबन पर रोक लगा दी और 11 अक्टूबर 2015 से पूरे वेतन के साथ उनकी बहाली का आदेश दिया था.

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