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लखीमपुर हिंसा: सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से कहा- आप मामले में बहुत धीमा काम कर रहे हैं

सुप्रीम कोर्ट को राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार की ओर से बताया गया था कि न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 44 में से चार गवाहों के बयान दर्ज कर लिए हैं. इस पर मुख्य न्यायाधीश ने सवाल किया था कि आपने 44 गवाहों में से सिर्फ़ चार के ही बयान क्यों दर्ज किए हैं, बाकी के क्यों नहीं? बीते तीन अक्टूबर को लखीमपुर खीरी में किसानों के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा मामले में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा आरोपी हैं.

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के शेष गवाहों के बयान न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराए जाएं.

इस मामले में राज्य सरकार की कार्यशैली पर टिप्पणी करते हुए न्यायालय ने कहा कि उसे लगता है कि वह ‘इस मामले में बहुत धीमे काम कर रही’ है.

शीर्ष अदालत तीन अक्टूबर को लखीमपुर खीरी में किसानों के एक प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत के मामले में सुनवाई कर रही थी.

न्यायालय को राज्य सरकार ने बताया कि न्यायिक मजिस्ट्रेट ने 44 में से चार गवाहों के बयान दर्ज कर लिए हैं.

मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने राज्य सरकार द्वारा सीलबंद लिफाफे में दाखिल स्थिति रिपोर्ट पर गौर किया. हालांकि न्यायालय ने कहा कि इस रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में देने की कोई जरूरत नहीं थी.

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश रमना ने कहा, ‘आपने 44 गवाहों में से सिर्फ चार के ही बयान क्यों दर्ज किए हैं? बाकी के क्यों नहीं?’

कोर्ट ने इस बात पर भी नाराजगी जाहिर की कि वे पिछले रात को एक बजे तक यूपी सरकार के स्टेटस रिपोर्ट का इंतजार करते रहे, लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला.

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘हमने बीती रात एक बजे तक रिपोर्ट का इंतजार किया. लेकिन हमें कुछ नहीं मिला.’

राज्य सरकार ने पीठ को बताया कि न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष गवाहों के बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया जारी है.

शीर्ष अदालत ने मामले की आगे की सुनवाई के लिए 26 अक्टूबर की तिथि तय की है.

इस मामले में अब तक केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा समेत 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. हिंसा के बाद छठे दिन आशीष को नौ अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था.

विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अब तक मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा, अंकित दास, आशीष पांडेय, लवकुश राणा, शेखर भारती और लतीफ उर्फ काले सहित 10 लोगों को गिरफ्तार किया है. बीते 18 अक्टूबर को सुमित जायसवाल, शिशुपाल, सत्यप्रकाश त्रिपाठी उर्फ सत्यम और नंदन सिंह बिष्ट को गिरफ्तार किया गया था.

दो वकीलों ने प्रधान न्यायाधीश को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि इस मामले की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए, जिसमें केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को भी शामिल किया जाए. इसके बाद शीर्ष अदालत ने मामले की सुनवाई शुरू की.

लखीमपुर खीरी के सांसद और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा ‘टेनी’ के विरोध में बीते तीन अक्टूबर को वहां के आंदोलित किसानों ने उनके (टेनी) पैतृक गांव बनबीरपुर में आयोजित एक समारोह में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के जाने का विरोध किया था. इसके बाद भड़की हिंसा में चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी.

केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध में करीब दस महीने से आंदोलन कर रहे किसानों की नाराजगी केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा ‘टेनी’ के उस बयान के बाद और बढ़ गई थी, जिसमें उन्होंने किसानों को ‘दो मिनट में सुधार देने की चेतावनी’ और ‘लखीमपुर खीरी छोड़ने’ की चेतावनी दी थी.

गाड़ी से कुचल जाने से मृत किसानों की पहचान- गुरविंदर सिंह (22 वर्ष), दलजीत सिंह (35 वर्ष), नक्षत्र सिंह और लवप्रीत सिंह (दोनों की उम्र का उल्लेख नहींं) के रूप में की गई है.

बीते तीन अक्टूबर को भड़की हिंसा में भाजपा के दो कार्यकर्ता- शुभम मिश्रा और श्याम सुंदर निषाद, केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के ड्राइवर हरिओम मिश्रा और एक निजी टीवी चैनल के लिए काम करने वाले पत्रकार रमन कश्यप की भी मौत हो गई थी.

किसानों का आरोप है कि केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा के पुत्र आशीष मिश्रा ने किसानों को अपनी गाड़ी से कुचला. हालांकि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने इस बात से से इनकार किया है.

किसानों के अनेक संगठन ‘कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार कानून, 2020’, ‘कृषक उत्पाद व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरण) कानून, 2020’ और ‘आवश्यक वस्तु (संशोधन) कानून’ को वापस लेने की मांग को लेकर पिछले साल नवंबर से आंदोलन कर रहे हैं.

पंजाब से शुरू हुआ यह आंदोलन धीरे-धीरे दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी फैल गया. शीर्ष अदालत ने जनवरी में कानूनों को अमल में लाने पर रोक लगा दी थी.

(समाचार एजेंसी भाषा से इनपुट के साथ)

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