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900 का टिकट 1500 में लेकर आ रहे बिहारी :देखिए बिहारियों में आतंकियों का खौफ, जम्मू से बिहार आने वाली ट्रेनें फुल

पटना
  • ट्रेन में खड़े होने तक की जगह नहीं है।

कश्मीर घाटी में आतंकी घटना से सहमे बिहारी रोटी की चिंता छोड़ जान बचाने के लिए भाग रहे हैं। उनके अंदर के खौफ का मंजर ट्रेनों में दिख रहा है। बिहार आने वाली हर ट्रेन फुल है। बर्थ से लेकर गैलरी तक में पैसेंजर्स हैं और ट्रेन में खड़े होने तक की जगह नहीं है। टॉयलेट में पानी तक मयस्सर नहीं तो खाने-पीने तक की व्यवस्था खुद ही सोच लीजिए। इसके बाद भी लोग जान बचाने के लिए किसी तरह से गांव पहुंचना चाहते हैं। आलम यह है कि ब्लैक में 900 रुपए का टिकट 1500 रुपए में ले रहे हैं। जानिए किस परिस्थिति में बिहारी कश्मीर की घाटी से निकल कर घर पहुंच रहे हैं…

खाने-पीने तक की समस्या

कश्मीर घाटी में बिहारी मजदूरों की हत्या के बाद लोग जम्मू स्टेशन पहुंच गए। नवगछिया के रहने वाले कुंदन ट्रेन में सवार हैं। उन्होंने भास्कर को बताया- “जम्मू से गुवाहाटी जाने वाली ट्रेन लोहित एक्सप्रेस में टिकट नहीं करा पाए। इस कारण से जम्मू में रुकना पड़ा था। इसके बाद 900 रुपए की टिकट के लिए 1500 रुपए दिया। ब्लैक में टिकट लेने के बाद बुधवार रात ट्रेन में बैठे हैं।’

उनका कहना है- “घाटी में ठेला लगाते थे। हालात खराब हुए तो साथियों के साथ घर के लिए निकल गए। जम्मू से आने वाली सभी ट्रेन पूरी तरह से फुल है। टॉयलेट सामान से भरे पड़े हैं और बर्थ से लेकर गैलरी तक में लोग हैं। भीड़ इतनी है कि स्लीपर बोगी में वेंडर भी नहीं आ पा रहे हैं। इस कारण से खाना पानी तक की समस्या है। भूखे प्यासे लोगों की हालत खराब हो रही है। सबसे अधिक परेशानी महिलाओं और बच्चों की है।’

जम्मू से बिहार आने वाली ट्रेन बयान कर रही खौफ

जम्मू से बिहार आने वाली हर ट्रेन की स्लीपर बोगियों में खड़े होने तक की जगह नहीं है। टॉयलेट में पानी नहीं है और खाने पीने का भी कोई इंतजाम नहीं, इसके बाद भी छोटे-छोटे बच्चों को लेकर मजदूर बिहार वापस लौट रहे हैं। यात्रियों ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया- “जम्मू से बुधवार रात 10.49 बजे ट्रेन में सवार हुए हैं। ट्रेन को पकड़ने के लिए यात्रियों ने काफी मारामारी की थी, टिकट नहीं मिलने के बाद भी वह ट्रेन में सवार हुए। ट्रेन में जगह के लिए शाम से ही स्टेशन पर लाइन में लग गए थे। हर दर्द सह लेंगे लेकिन अब जान का जोखिम नहीं उठाएंगे।’

36 घंटे के सफर में हर किलोमीटर पर चुनौती

कुंदन के साथी यात्रियों का कहना है- “36 घंटे का सफर है। बुधवार रात में ट्रेन में बैठे हैं। शुक्रवार सुबह 8 बजे के बाद नवगछिया पहुंचेंगे। पानी की बोतल जम्मू से जो लेकर चले थे, वह भी खत्म हो गया। भीड़ इतनी है कि ट्रेन से लोग स्टेशन पर पानी नहीं भर पा रहे हैं।’

सुरेश साव का कहना है- “पत्नी और दो बच्चों के साथ घर आ रहे हैं। टिकट नहीं था तो TTE ने 800 रुपए लेकर टिकट ले लिया। अब घर पहुंचने के बाद ही राहत मिल पाएगी। गांव पहुंचते-पहुंचते शुक्रवार रात हो जाएगी।’

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