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यूपी: ‘गुमशुदा’ लड़की से जुड़े मामले में हिरासत में लिए युवक की थाने में मौत, न्यायिक जांच की मांग

मामला कासगंज ज़िले का है. पुलिस का दावा है कि हिरासत में लिए गए अल्ताफ़ नाम के युवक ने शौचालय के नल की टोंटी से फांसी लगाकर आत्महत्या की है. घटना के बाद पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है. विपक्षी दलों ने राज्य की योगी सरकार और यूपी पुलिस पर निशाना साधते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है.

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में एक ‘गुमशुदा’ लड़की के मामले में हिरासत में लिए गए 22 वर्षीय युवक अल्ताफ की पुलिस थाने में बीते मंगलवार को मौत हो गई.

इसे लेकर कोतवाली पुलिस थाने के एसएचओ समेत पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है. पुलिस का दावा है कि अल्ताफ ने शौचालय के नल की टोंटी से फांसी लगाकर आत्महत्या किया है.

पुलिस अधीक्षक रोहन प्रमोद बोत्रे ने बताया कि एक नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर साथ ले जाने के मामले में पूछताछ के लिए नगला सैयद इलाके के रहने वाले अल्ताफ को हिरासत में लिया गया था. लड़की की गुमशुदगी को लेकर एक हिंदू परिवार ने शिकायत दर्ज कराई थी.

उन्होंने बताया कि पूछताछ के दौरान अल्ताफ ने शौचालय जाने की बात कही, उन्हें हवालात के अंदर बने शौचालय जाने दिया गया, जहां उन्होंने जैकेट के हुक में लगी डोरी को शौचालय के नल में फंसाकर अपना गला घोंटने की कोशिश की.

पुलिस के इस दावे पर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि यह नल महज दो-तीन फीट ही ऊंचा था.

बोत्रे ने बताया कि आरोपी के न लौटने पर पुलिसकर्मी शौचालय के अंदर गए, जहां उन्होंने अल्ताफ को गंभीर अवस्था में पाया. इसके बाद तत्काल उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां उसकी मौत हो गई.

एक ऑटोप्सी रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई है कि फांसी लगाने से युवक की मौत हुई है.

शुरुआत में मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया था कि पुलिस द्वारा बेरहमी से पीटे जाने की वजह से अल्ताफ की मौत हुई है. हालांकि अब पुलिस ने मृतक के पिता का एक लिखित बयान पेश किया है, जिसमें कहा गया है कि उनका बेटा अवसाद से पीड़ित था.

कक्षा 10 में पढ़ने वाली ‘गुमशुदा’ लड़की को अभी भी पुलिस नहीं ढूंढ पाई है.

बीते मंगलवार की रात अल्ताफ के पिता चांद मियां ने पुलिस पर हत्या का आरोप लगाया था, लेकिन बाद में एक वीडियो में उन्होंने कहा कि वह उस समय गुस्से में थे और उन्होंने जो कहा उसका मतलब यह नहीं था.

उन्होंने कहा, ‘मैंने डॉक्टरों, पुलिस से बात की और पता चला कि अल्ताफ की मौत आत्महत्या से हुई है. पुलिस उसे अस्पताल भी ले गई थी. मैं पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट हूं.’ चांद मिया मजदूरी का काम करते हैं.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, अल्ताफ के चाचा शाकिर अली ने कहा कि केस लड़ने के लिए उनके पास संसाधन नहीं हैं.

उन्होंने कहा, ‘हम गरीब लोग हैं और बस जीवित रहना चाहते हैं. हम मांग करने की स्थिति में नहीं हैं. जब हम उससे मिले थे तो वह जीवित और बिल्कुल ठीक था. हमें नहीं पता कि बाद में क्या हुआ.’

पुलिस अधीक्षक रोहन प्रमोद बोत्रे ने कहा कि अल्ताफ और लड़की के बीच प्रेम संबंध था, लेकिन उनका रिश्ता टूट गया था. उन्होंने इसे साबित करने के लिए उनके पास सबूत हैं. पुलिस का कहना है कि दोनों की मुलाकात लड़की के घर पर कुछ निर्माण कार्य के दौरान हुई थी, जिसमें अल्ताफ बतौर मजदूर काम कर रहे थे.

सूत्रों ने बताया कि इस मामले को लेकर लड़की के परिवार ने पुलिस के साथ एक वीडियो साझा किया है.

पुलिस प्रताड़ना के आरोपों पर एसपी प्रमोद ने कहा, ‘पुलिस थाना शहर के बीच में ही स्थित है. यह काफी व्यस्त थाना है, जहां लोग आते रहते हैं. यह संभव नहीं है कि अल्ताफ को पीटा गया हो और किसी ने देखा न हो.’

उन्होंने कहा कि यदि इसे लेकर कोई शिकायत कराता है तो पुलिसवालों के खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा.

विपक्ष ने योगी सरकार को घेरा

इस मामले को लेकर विपक्षी दलों ने राज्य की योगी सरकार और यूपी पुलिस पर निशाना साधा है और निष्पक्ष जांच की मांग की है.

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने पुलिस हिरासत में युवक की मौत को दुखद और शर्मनाक बताते हुए राज्य सरकार से घटना की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषियों को सख्त सजा देने की मांग की है.

मायावती ने गुरुवार को ट्वीट किया, ‘कासगंज में पुलिस हिरासत में एक और युवक की मौत अति दुखद व शर्मनाक है. सरकार घटना की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों को सख्त सजा दे तथा पीड़ित परिवार की मदद करे. उत्तर प्रदेश सरकार हिरासत में आए दिन होने वाली मौतों को रोकने व पुलिस को जनता की रक्षक बनाने में विफल साबित हो रही है,जो अति चिन्ता की बात है.’

वहीं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने इस मामले को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि राज्य में मानवाधिकार नाम की कोई चीज नहीं बची है तथा वहां कोई भी सुरक्षित नहीं है.

राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘क्या उत्तर प्रदेश में मानवाधिकार नाम की कोई चीज बची है?’

कांग्रेस की उत्तर प्रदेश प्रभारी प्रियंका ने ट्वीट कर आरोप लगाया, ‘कासगंज में अल्ताफ, आगरा में अरुण वाल्मीकि, सुल्तानपुर में राजेश कोरी की पुलिस हिरासत में मौत जैसी घटनाओं से साफ है कि रक्षक, भक्षक बन चुके हैं.’

उन्होंने दावा किया, ‘यूपी पुलिस हिरासत में मौत के मामले में देश में सबसे ऊपर है. भाजपा राज में कानून व्यवस्था पूरी तरह चौपट है. यहां कोई भी सुरक्षित नहीं है.’

इसी तरह उत्तर प्रदेश की मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) ने इस मामले की न्यायिक जांच की मांग की है.

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले में पुलिसकर्मियों के निलंबन को सिर्फ दिखावटी कार्रवाई बताते हुए प्रकरण की न्यायिक जांच की मांग की है.

उन्होंने ट्वीट में कहा, ‘कासगंज में पूछताछ के लिए लाए गए युवक की थाने में मौत का मामला बेहद संदेहास्पद है. लापरवाही के नाम पर कुछ पुलिसवालों का निलंबन सिर्फ दिखावटी कार्रवाई है. इस मामले में इंसाफ व भाजपा के राज में पुलिस में विश्वास की पुनर्स्थापना के लिए न्यायिक जांच होनी ही चाहिए.’

इसके अलावा सपा ने भी ट्वीट कर कहा, ‘भाजपा राज में हिरासत में एक और मौत. कासगंज में पुलिस हिरासत के दौरान युवक की हत्या, यूपी के ठोको पुलिस का एक और कारनामा है. प्रदेश में अपराधी और पुलिस लगातार मुख्यमंत्री की सरपरस्ती में कानून व्यवस्था का एनकाउंटर कर रहे हैं. दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का केस चले, मिले सजा.’

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