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हबीबगंज हो सकता है अटल जंक्शन

  • क्यों रखा गया था यह नाम, कब हुई स्थापना; जानिए, वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन की पूरी कहानी
मध्य प्रदेश

देश का पहला वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन हबीबगंज नए रूप में बनकर तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 नवंबर को इसका लोकार्पण करेंगे। हबीबगंज स्टेशन का नाम बदलने की भी तैयारी है। इसका नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखा जाएगा। मध्यप्रदेश सरकार पहले ही प्रपोजल भेज चुकी है। हालांकि, स्टेशन का नाम गृह मंत्रालय बदलेगा। यह तीसरा मौका है जब इसका नाम बदला जा रहा है। इस स्टेशन पर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, हॉस्पिटल, मॉल, स्मार्ट पार्किंग, हाई सिक्योरिटी समेत कई आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी।

आइए आपको बताते हैं कि हबीबगंज रेलवे स्टेशन की शुरुआत कब हुई थी, कैसे पड़ा इसका नाम और एक सामान्य रेलवे स्टेशन से वर्ल्ड क्लास तक का सफर…

कब बना हबीबगंज स्टेशन

मौजूदा रेल नेटवर्क को 1952 में एडमिनिस्ट्रेटिव पर्पज के लिए 6 जोन में डिवाइड किया गया। इसके बाद कई स्टेशन बनाए गए, जिनमें हबीबगंज भी शामिल था। 1979 में हबीबगंज रेलवे स्टेशन का निर्माण किया गया। दरअसल, 16 अप्रैल 1853 बॉम्बे से 14 कोच और 400 पैसेंजर के साथ भारत की पहली ट्रेन ठाणे के लिए रवाना हुई। इस ट्रेन ने 34 किलोमीटर की दूरी तय की। इसके बाद भारत ने नए युग की ओर पहला कदम तब रखा, जब स्टीम इंजनों का निर्माण शुरू हुआ। राजपूताना मालवा के अजमेर वर्कशॉप में पहला स्टीम लोको नंबर F-734 1895 बनाया गया था। बाद में बढ़ती जरूरतों को देखते हुए 1901 में रेलवे बोर्ड का गठन किया गया। आजादी के बाद बड़े शहरों को जोड़ने के लिए कई लाइनों को री-रूट किया गया और नई लाइनें बनाई गईं। इसके बाद हबीबगंज स्टेशन बना था। भारत की 42 रियासतों के स्वामित्व वाले रेलवे को जोड़कर इंडियन रेलवे का गठन हुआ। 1947 में आजादी के बाद भारतीय रेल का 55 हजार किलोमीटर का नेटवर्क था।

हबीबगंज नाम क्यों रखा गया

अंग्रेजों ने 1905 में इस जगह को बनाया था। स्टेशन का नाम हबीब मियां के नाम पर रखा गया था। इससे पहले इसका नाम शाहपुर था। हबीब मियां ने 1979 में स्टेशन के विस्तार के लिए अपनी जमीन दान में दी थी। इसके बाद इसका नाम हबीबगंज रखा गया। उस समय आज के एमपी नगर का नाम गंज हुआ करता था। ऐसे में रेलवे स्टेशन का नाम दोनों को जोड़कर हबीबगंज रखा गया।

हबीब का अर्थ?

ISO प्रमाण पत्र हासिल करने वाले वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन हबीबगंज के आसपास की सुंदरता, यहां की हरियाली और झीलें इसकी सुंदरता को बढ़ाती थी। अरबी भाषा में हबीब का अर्थ होता है प्यारा और सुंदर। कहा तो यह भी जाता है कि भोपाल के नवाब की बेगम ने यहां की हरियाली और झीलों के बीच बसे इस रेलवे स्टेशन की सुंदरता को देखते हुए इसे हबीबगंज नाम दिया था।

आईएसओ-9001 सर्टिफाइड देश का पहला स्टेशन

हबीबगंज देश में पहला आईएसओ-9001 सर्टिफाइड रेलवे स्टेशन है। यह स्टेशन भारत की पहली सर्टिफाइड ट्रेन शान-ए- भोपाल एक्सप्रेस का हैडक्वार्टर भी है, जहां कई बड़ी ट्रेनों का स्टॉपेज है।

मॉडर्नाइजेशन का पहला कॉन्ट्रेक्ट कब हुआ

14 जुलाई 2016 भारतीय रेल के लिए ऐतिहासिक दिन था। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) के तहत इंडियन रेलवे ने 1979 में तैयार हुए हबीबगंज स्टेशन के मॉडर्नाइजेशन के लिए पहला कॉन्ट्रेक्ट किया। 5 सालों तक चले मॉडर्नाइजेशन प्रोजेक्ट के बाद जुलाई 2021 में हबीबगंज स्टेशन बनकर तैयार हो गया। इस स्टेशन में वर्ल्ड क्लास सुविधाएं हैं। इन पर करीब 100 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। यात्रियों को किसी तरह की कोई परेशानी न हो, इसे ध्यान में रखते हुए सुविधाएं देने की कोशिश की गई हैं। आने वाले समय में स्टेशन को ब्रिज के जरिए तैयार हो रहे मेट्रो स्टेशन से भी जोड़ा जाएगा।

किससे हुआ करार?

हबीबगंज रेलवे स्‍टेशन को एयरपोर्ट की तर्ज पर विकसित करने के लिए भारतीय रेलवे ने बंसल ग्रुप के साथ करार किया। तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु की उपस्थिति में हबीबगंज रेलवे स्‍टेशन के री-डेवलपमेंट और मॉडर्नाइजेशन के लिए भारतीय रेल स्‍टेशन विकास निगम लिमिटेड (IRSDC) और बंसल ग्रुप के बीच समझौते पर हस्‍ताक्षर किए गए थे।

कई बार बढ़ी डेडलाइन

हबीबगंज स्टेशन को वर्ल्ड क्लास बनाने का काम मार्च 2017 से शुरू हुआ था। इसे दिसंबर 2018 तक पूरे करने के दावे किए थे। दूसरी डेडलाइन जुलाई 2019 थी, तब भी काम पूरा नहीं हो सका था। फिर 31 दिसंबर 2019 तक काम पूरा करने का दावा किया गया, लेकिन काम तब भी पूरा नहीं हुआ। इसके बाद मार्च 2020 डेडलाइन दी गई, लेकिन फिर भी काम पूरा नहीं हुआ और फिर कोरोना संक्रमण काल आ गया, जिसके कारण काम में देरी हुई।

प्रभात झा ने रेल मंत्री को लिखा पत्र- हबीबगंज का नाम ‘अटल जंक्शन’ किया जाए

हबीबगंज स्टेशन का नाम ‘अटल जंक्शन’ करने के लिए बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सदस्य प्रभात झा ने सितंबर 2020 को रेल मंत्री पीयूष गोयल को एक पत्र लिखा था। उन्होंने दलील दी थी कि हबीबगंज नाम का कोई इतिहास नहीं है, इसलिए स्टेशन का नाम हबीबगंज होने का कोई औचित्य नहीं है।

उन्होंने कहा था कि पश्चिम-मध्य रेलवे की 16 सितंबर 2019 को हुई बैठक में यह प्रस्ताव दिया गया था। इसका सभी सांसदों ने समर्थन किया था। विदित हो कि पूर्व में उत्तर प्रदेश सरकार और रेल मंत्रालय की सहमति से मुगल सराय स्टेशन का नाम दीनदयाल उपाध्याय स्टेशन एवं इलाहाबाद स्टेशन का नाम प्रयागराज स्टेशन किया जा चुका है।

पूर्व राज्यसभा सांसद प्रभात झा का रेल मंत्री को लिखा पत्र।
पूर्व राज्यसभा सांसद प्रभात झा का रेल मंत्री को लिखा पत्र।

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