October 3, 2026 6:44 pm

करोड़ों का CA प्रोजेक्ट या कागजी हरियाली? पोड़ी-बचरा में गड्ढों की खुदाई से उठे सवाल

  • परसा ओपन कास्ट कोल माइंस के एवज में स्वीकृत क्षतिपूरक वनीकरण योजना पर गंभीर सवाल; पोस्टिंग से लेकर गड्ढा खुदाई और मजदूरी तक जांच की मांग

अब्दुल सलाम क़ादरी। बैकुंठपुर/कोरिया। परसा ओपन कास्ट कोल माइंस के एवज में कोरिया वन मंडल के बैकुंठपुर वन परिक्षेत्र अंतर्गत पोड़ी-बचरा में स्वीकृत क्षतिपूरक वनीकरण (CA Plantation) का करोड़ों रुपये का प्रोजेक्ट अब अपने मूल उद्देश्य से ज्यादा विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा में है। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि करोड़ों के इस प्रोजेक्ट में पारदर्शिता और जमीनी क्रियान्वयन को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

मामले को लेकर विभागीय गलियारों और स्थानीय स्तर पर अधिकारियों-कर्मचारियों की सक्रियता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

करोड़ों का प्रोजेक्ट और ‘जुगाड़’ से वापसी की चर्चा

सूत्रों के मुताबिक, कोरिया वन मंडल में कुछ अधिकारियों की पदस्थापना और बड़े CA प्रोजेक्ट की मंजूरी के बीच संबंध को लेकर चर्चाएं हैं।

आरोप लगाया जा रहा है कि वर्तमान डीएफओ परदेशी को परसा माइंस के एवज में कोरिया वन मंडल में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड CA प्लांटेशन के बड़े बजट की जानकारी पहले से थी और इसी कारण उनकी दोबारा पदस्थापना को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

यदि इन आरोपों में तथ्य है, तो यह सवाल जरूर उठता है कि क्या विभागीय स्थानांतरण नीति के समानांतर किसी प्रभाव या विशेष व्यवस्था ने भूमिका निभाई?

रेंजर से एसडीओ तक—’गृह वन मंडल’ वापसी भी चर्चा में

मामले में एक अन्य अधिकारी कंवर का नाम भी स्थानीय चर्चाओं में सामने आ रहा है। बताया जाता है कि वे पूर्व में कोरिया वन मंडल में रेंजर के पद पर पदस्थ रहे और पदोन्नति के बाद अन्य जिलों में सेवाएं देते रहे।

बाद में बैकुंठपुर में एसडीओ के रूप में उनकी वापसी हुई। इसी दौरान पोड़ी-बचरा CA प्रोजेक्ट में उनकी सक्रियता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

मुगूम बारी पैच में चल रहे कार्यों को लेकर स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी है कि मजदूरों के विरोध और मौके की समस्याओं को संभालने में अधिकारी की सक्रिय भूमिका रही।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सक्रियता पूरी तरह प्रशासनिक जिम्मेदारी के तहत थी या परियोजना से जुड़े किसी अन्य हित के कारण?

इसका जवाब विभागीय दस्तावेज और स्वतंत्र जांच से ही सामने आ सकता है।

₹20 प्रति गड्ढे की मजदूरी ने बढ़ाया विवाद

पोड़ी-बचरा के मुगूम बारी पैच में गड्ढा खुदाई कार्य को लेकर मजदूरों की नाराजगी की बात भी सामने आई है।

बताया जा रहा है कि शुरुआत में मजदूरों को करीब ₹20 प्रति गड्ढा की दर से काम कराने की बात सामने आई। मजदूरों के विरोध के बाद काम प्रभावित हुआ और बाद में विभागीय स्तर पर समझाइश के बाद कार्य दोबारा शुरू कराया गया।

यहां जांच का महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि—

  • स्वीकृत मजदूरी दर क्या थी?
  • वास्तविक मजदूरों को कितनी राशि दी गई?
  • मस्टररोल में कितने मजदूर दर्ज हैं?
  • मौके पर वास्तव में कितने मजदूर काम कर रहे थे?
  • गड्ढों की वास्तविक संख्या कितनी है?
  • भुगतान किस अधिकारी के सत्यापन के बाद किया गया?

इन सवालों के जवाब रिकॉर्ड की जांच से निकाले जा सकते हैं।

बारिश के मौसम में गड्ढा खुदाई पर भी सवाल

CA Plantation का उद्देश्य सिर्फ गड्ढे खोदना नहीं बल्कि पौधरोपण कर उसे जीवित रखना है। इसके लिए स्थल की तैयारी, मिट्टी की स्थिति, पौधों की उपलब्धता, रोपण का समय, सुरक्षा और रखरखाव की पूर्व योजना आवश्यक होती है।

आरोप है कि मुगूम बारी पैच में पर्याप्त पूर्व तैयारी के बिना बारिश के दौरान ही गड्ढा खुदाई का काम शुरू कराया गया।

यदि ऐसा हुआ है तो यह जांच का विषय है कि क्या कार्ययोजना और तकनीकी मापदंडों के अनुरूप काम कराया गया था या केवल प्रगति दिखाने के लिए गड्ढा खुदाई को प्राथमिकता दी गई।

रिटायर्ड कर्मचारी और ‘चहेतों’ की सक्रियता पर भी सवाल

मामले में कुछ सेवानिवृत्त कर्मचारियों और विभाग से जुड़े लोगों की कथित सक्रियता को लेकर भी चर्चा है।

यदि कोई सेवानिवृत्त कर्मचारी आधिकारिक रूप से परियोजना से जुड़ा है तो उसका आदेश और जिम्मेदारी स्पष्ट होनी चाहिए। वहीं यदि कोई व्यक्ति बिना अधिकृत भूमिका के विभागीय कार्यों को प्रभावित कर रहा है, तो यह भी जांच का विषय होना चाहिए।

करोड़ों के प्रोजेक्ट में किसे क्या जिम्मेदारी दी गई, किसे भुगतान हुआ और किसने कार्य का सत्यापन किया, इसकी पूरी श्रृंखला सार्वजनिक जांच के दायरे में आनी चाहिए।

क्या गड्ढों से आगे भी बढ़ेगा CA Plantation?

इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यही है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद जमीन पर वास्तविक हरियाली कितनी दिखाई देगी।

किसी भी CA Plantation की सफलता केवल इस आधार पर नहीं मापी जा सकती कि कितने गड्ढे खोदे गए। असली सवाल है—

कितने पौधे लगाए गए?
कितने पौधे जीवित बचे?
उनकी सुरक्षा कैसे की गई?
कितने वर्षों तक रखरखाव हुआ?
और सरकार द्वारा खर्च की गई राशि का वास्तविक पर्यावरणीय परिणाम क्या निकला?

यदि गड्ढे खोदने, पौधे लगाने और भुगतान करने के बाद निगरानी कमजोर रही तो करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद उद्देश्य अधूरा रह सकता है।

अब जांच हुई तो सामने आएगी पूरी तस्वीर

पोड़ी-बचरा CA Plantation में कथित अनियमितताओं की सच्चाई जानने के लिए केवल विभागीय रिपोर्ट पर्याप्त नहीं होगी। स्वतंत्र भौतिक सत्यापन और दस्तावेजी ऑडिट जरूरी है।

जांच में विशेष रूप से इन दस्तावेजों की पड़ताल होनी चाहिए—

CA स्वीकृति आदेश, DPR, तकनीकी स्वीकृति, प्रशासनिक स्वीकृति, कार्यादेश, निविदा/कार्य आवंटन प्रक्रिया, मस्टररोल, मजदूरी भुगतान, पौधों की खरीदी, परिवहन बिल, पौधरोपण की GPS/जियो-टैगिंग, स्थल निरीक्षण रिपोर्ट और पौध जीवितता रिपोर्ट।

इन दस्तावेजों का मौके की वास्तविक स्थिति से मिलान किया जाए तो यह स्पष्ट हो सकता है कि परियोजना वास्तव में जंगल तैयार करने की दिशा में बढ़ रही है या सिर्फ कागजी प्रगति तक सीमित है।

सबसे बड़ा सवाल

परसा माइंस के एवज में मिली करोड़ों की क्षतिपूरक वनीकरण राशि का लाभ आखिर जंगल को मिलेगा या सिर्फ परियोजना से जुड़े लोगों को?

देखना यह है कि कार्य पूर्ण होने के उपरांत विभाग क्या गुल खिलायेगा, बने रहिए हमारे साथ जंगल की हर कहानी की चाबी हमारे पास है , अधिकारी ये ना सोचे कि अब्दुल सलाम क़ादरी को कुछ मालूम नही है अधिकारियों के चड्डी के कलर के साथ उनकी और उनके रिश्तेदारों और चहेते कर्मचारियों के नाम कितनी बेनामी और नामी सम्पत्ति है सभी का खाका हमारे पास मौजूद है? नोट-हम बोलते कम है और कलम ज्यादा चलाते हैं….

इसी कड़ी में अगला अपडेट जल्द आपके सामने….

Khabar 30 Din
Author: Khabar 30 Din

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