October 5, 2026 12:50 pm

अवैध उगाही की जुगत में वैध दस्तावेज होने के बाद भी बस सीज, एक ही सुबह दो चालान – बस मालिक ने RTO पर परेशान करने का लगाया आरोप.!!!*

*अवैध उगाही की जुगत में वैध दस्तावेज होने के बाद भी बस सीज, एक ही सुबह दो चालान – बस मालिक ने RTO पर परेशान करने का लगाया आरोप.!!!*

*आरटीओ की भ्रष्ट कार्य प्रणाली से क्षुब्ध होकर पीड़ित बस मालिक ने हाई कोर्ट प्रयाग राज में याचिका की दाखिल…!!!*

*हाई कोर्ट 7 अक्टूबर को संबंधित परिवहन अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से बस की मौजूदा हालत के सर्वे रिपोर्ट के साथ किया तलब… बस के समस्त दस्तावेज सहित हाजिर होने के दिए निर्देश.!!!*

*प्रयागराज….स्टार टूर एंड ट्रेवल्स चिरमिरी छत्तीसगढ़ के बस संचालक ने आरोप लगाया है कि समस्त वैध दस्तावेज – परमिट, फिटनेस, बीमा, टैक्स, PUC होने के बावजूद उनकी बस को *रणवीर सिंह चौहान पी टी ओ प्रयागराज ने व्यक्तिगत रंजिश रखते हुए विधि विरुद्ध तरीके से बस जप्त कर 7 महीने से रोडवेज बस स्टेशन, सिविल लाइंस में खड़ा रखा गया है.!!!*

*हाईकोर्ट में दाखिल WRIT-A No. 3658/2026 में याचिकाकर्ता का पक्ष ये है -*

*1. एक ही दिन, कुछ मिनट के अंतर में दो चालान -*
– पहला चालान – *21 फरवरी 2026, सुबह 06:21 बजे, नवाब युसूफ रोड* पर – अतिरिक्त सीट का हवाला
– दूसरा चालान – उसी दिन *सुबह 06:54 बजे, महात्मा गांधी मार्ग, जॉर्ज टाउन* पर – परमिट शर्त उल्लंघन का हवाला

याचिकाकर्ता के वकील *गोविंद नारायण मिश्रा* का तर्क है कि पहला चालान काटने के बाद ही बस को कब्जे में ले लिया गया था, तो 33 मिनट बाद दूसरी जगह पर चलने के नाम पर दूसरा चालान कैसे काटा जा सकता है? जब बस पहले ही RTO के कब्जे में थी, तो वह जॉर्ज टाउन कैसे पहुंच गई?

*2. बिना सीजर मेमो के जप्ती -*
याचिका के पैरा 19 के अनुसार बस जप्त करते समय कोई सीजर मेमो नहीं दिया गया। बस में छत्तीसगढ़ से खागा-फतेहपुर जा रहे पर्यटक सवार थे (पैरा 16)। परमिट पर 40 सीट (11 स्लीपर + 29 सिटिंग) दर्ज थी और चालान की तिथि पर परमिट टैक्स ऑथराइजेशन ऑल इंडिया टैक्स सभी वैध था

*3. 7 महीने में बस कबाड़ -*
याचिकाकर्ता का कहना है कि *21 फरवरी से 28 सितंबर तक* बस रोडवेज परिसर में खड़ी रही। इस दौरान टायर, बैटरी, सीटें और निकालने लायक सारा सामान गायब हो गया।

*हाईकोर्ट की टिप्पणी से बल मिला -*
28 सितंबर को *जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्य वीर सिंह* की बेंच ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि “याचिकाकर्ता को अंधेरे में रखा गया है” और *7 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2 बजे* संबंधित परिवहन अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से फाइल और बस की मौजूदा हालत की सर्वे रिपोर्ट के साथ हाजिर होने का आदेश दिया है।

बस मालिक का कहना है कि उन्होंने बस छुड़ाने के लिए हर स्तर पर प्रयास किया,लेकिन सुनवाई नहीं हुई, पी टी ओ और उनका साला अपनी मनमानी शब्द मानने के लिए मजबूर करा रहे थे तब मजबूरन हाईकोर्ट आना पड़ा। याचिकाकर्ता ने इस पूरे मामले में *पी टी ओ रणधीर सिंह चौहान से कार्यशैली से परेशान* होने की बात कही है।
अब बस मालिक द्वारा ये सभी आरोप याचिका में लगाए गए हैं, जिन पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को है

वही न्यायालय के आदेश के दूसरे दिवस ही*प्रयागराज वसूली कांड में पी टी ओ रणवीर सिंह चौहान सस्पेंड – प्राइवेट ड्राइवर गिन रहा था नोट, अधिकारी-स्टाफ गायब होने की खबर थी प्रतिदिन उसका साला बड़े सवेरे उठकर सरकारी गाड़ी में वसूली के लिए निकल जाता था ऐसी खबर लगातार प्रकाशित हो रही है

प्रयागराज के वायरल वीडियो मामले में आखिरकार बड़े अधिकारी पर कार्रवाई हुई है। परिवहन आयुक्त, उत्तर प्रदेश ने *पत्र संख्या- 3882 ई/2026-157 ई/2026, दिनांक 29 सितंबर 2026* को जारी *’कार्यालय-आदेश’* में *श्री रणवीर सिंह चौहान, यात्री/मालकर अधिकारी, प्रयागराज* को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

*आदेश में क्या लिखा है -*

उप परिवहन आयुक्त (परिक्षेत्र), कानपुर की आख्या दिनांक 29.09.2026 के अनुसार सोशल मीडिया / लाइव न्यूज में जनपद प्रयागराज के प्रवर्तन वाहन *UP32-FG-3603* में प्राइवेट व्यक्ति नोट गिनता दिख रहा है।

जांच में पुष्टि हुई कि –
1. ये प्रवर्तन वाहन यात्री/मालकर अधिकारी रणवीर सिंह चौहान का है।
2. नोट गिनने वाला व्यक्ति उनका प्राइवेट चालक प्रदीप सिंह चौहान का साला *पुष्पेन्द्र सिंह* है।
3. वायरल वीडियो में *प्रवर्तन वाहन में प्राइवेट व्यक्ति कैश गिन रहा है, वहाँ पर यात्री/मालकर अधिकारी तथा प्रवर्तन स्टाफ मौजूद नहीं दिख रहे हैं, जो कि आपत्तिजनक है।* उक्त कृत्य के लिए श्री रणवीर सिंह चौहान प्रथम दृष्ट्या उत्तरदायी है।

आदेश के पैरा-2 में स्पष्ट लिखा है कि श्री चौहान द्वारा *प्रवर्तन कार्यवाही के दौरान प्राइवेट व्यक्ति के माध्यम से अवैध वसूली की जा रही है, जिससे यह परिलक्षित होता है कि श्री चौहान का अपने स्टॉफ पर कोई नियंत्रण नहीं है।* इससे विभाग की छवि धूमिल हुई है। यह उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली-1956 के विपरीत है।

*क्या कार्रवाई हुई -*

– उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 1999 के तहत अनुशासनिक कार्यवाही संस्थित करते हुए निलंबित।
– निलंबन अवधि में मुख्यालय, परिवहन आयुक्त कार्यालय, लखनऊ से संबद्ध रहेंगे।
– जांच अधिकारी – *श्री वी.के. सिंह, उप परिवहन आयुक्त (नगर परिवहन), उत्तर प्रदेश* को नामित किया गया है, जिन्हें एक माह में जांच आख्या देनी है।
– हस्ताक्षर – *(आशुतोष निरंजन), परिवहन आयुक्त, उत्तर प्रदेश।*

*इससे पहले सिपाही भी सस्पेंड -*

इसी मामले में एक दिन बाद 01 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश संख्या 1639 में प्रवर्तन सिपाही *आशीष त्रिपाठी* को भी इसी वाहन में अवैध वसूली में प्रथम दृष्टया संलिप्तता पर सस्पेंड किया गया था।

यानी अब इस केस में *अधिकारी और सिपाही* निलंबित हो चुके हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि प्राइवेट चालक और वीडियो रणवीर सिंह चौहान का साला पुष्पेन्द्र सिंह की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए कि सरकारी प्रवर्तन वाहन में उसे कैश गिनने का अधिकार किसने दिया।

Khabar 30 Din
Author: Khabar 30 Din

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