July 4, 2026 12:37 am

महासमुंद वनमंडल में एएनआर योजना के नाम पर करोड़ों का घोटाला! — विभिन्न वन परीक्षेत्रों में फर्जी कार्य और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप

अब्दुल सलाम क़ादरी-प्रधान संपादक 9424257566

महासमुंद (छत्तीसगढ़):
छत्तीसगढ़ के महासमुंद वनमंडल में एएनआर (एडवांस्ड नेचुरल रीजेनरेशन) योजना के तहत करोड़ों रुपये के कथित घोटाले का मामला एक बार फिर चर्चा में है। शिकायतों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आरोप लगाया गया है कि वनमंडल के विभिन्न वन परीक्षेत्रों में बिना वास्तविक कार्य किए ही भारी-भरकम राशि का आहरण कर लिया गया।

वन विभाग के अभिलेखों में एएनआर कार्य पूर्ण दर्शाए गए हैं, जबकि आरोप है कि जिन स्थानों पर पौधारोपण, नर्सरी निर्माण और संरक्षण कार्य दर्ज किए गए, वहां जमीनी स्तर पर अपेक्षित कार्य दिखाई नहीं देते।

दर्जनों कक्षों में बिना काम किए करोड़ों की निकासी का आरोप

सूत्रों के अनुसार, महासमुंद वनमंडल में वर्ष 2020 से 2026 के बीच एएनआर योजना के तहत पौधारोपण, संरक्षण एवं रखरखाव के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च दर्शाए गए। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कई कक्षों में कार्य अधूरा होने के बावजूद रिकॉर्ड में 100 प्रतिशत कार्य पूर्ण दिखाकर भुगतान कर दिया गया।

अभिलेखों में हेरफेर, फर्जी बाउचर और मजदूरी भुगतान के आरोप

आरोप है कि कई फाइलों में एएनआर कार्यों के प्राकलन, मापन पुस्तिका, निरीक्षण प्रतिवेदन तथा पौधों की गणना संबंधी दस्तावेज अधूरे या अनुपलब्ध हैं। इसके बावजूद विभागीय रिकॉर्ड में कार्य पूर्ण दर्शाकर वित्तीय वर्ष के अंत में राशि का आहरण कर लिया गया।

शिकायतकर्ता ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की

शिकायतकर्ता अब्दुल सलाम कादरी का कहना है कि यह केवल वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं बल्कि प्रशासनिक स्तर पर गंभीर लापरवाही और संभावित हेराफेरी का विषय है।

उनका आरोप है कि विभाग के कुछ वरिष्ठ अधिकारी पूरे मामले को वैध दिखाने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि छोटे कर्मचारियों पर दबाव बनाया जाता है।

वन विभाग के भीतर भी असंतोष

सूत्रों के अनुसार, एएनआर कार्यों में लगभग 35 से 50 प्रतिशत कार्य अधूरा होने के बावजूद उसे पूर्ण दर्शाने की शिकायतें सामने आई हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला बड़े वित्तीय घोटाले का रूप ले सकता है।

विभाग का पक्ष

वन विभाग के संबंधित अधिकारियों से इस मामले में प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। विभाग की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी भी जारी नहीं की गई है।

जांच की मांग

शिकायतकर्ता अब्दुल सलाम कादरी ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो इसकी जिम्मेदारी केवल स्थानीय कर्मचारियों की नहीं बल्कि उच्च अधिकारियों की भी तय होनी चाहिए।

वर्तमान छत्तीसगढ़ सरकार आखिर जांच क्यो नही करवाना चाहती है? 

  • क्या महासमुंद वनमंडल में एएनआर कार्यों की भौतिक जांच कराई गई?
  • अधूरे कार्यों को पूर्ण दर्शाने का आधार क्या था?
  • करोड़ों रुपये के भुगतान से पहले किस स्तर पर सत्यापन किया गया?
  • यदि अनियमितताएं हुई हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी?

इन सवालों के जवाब आने वाले समय में तय करेंगे कि यह मामला प्रशासनिक लापरवाही का है या बड़े वित्तीय घोटाले का।

इस मामले से जुड़ा अगला खुलासा जल्द।

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