July 8, 2026 11:27 pm

“एक पेड़ माँ के नाम… या करोड़ों के खेल के नाम? परसगढ़ी में फिर होगा महाउत्सव, सवालों के जंगल में जवाब अब भी गुम!”

  • आरटीआई में जानकारी देने से इनकार, पुराने सवाल 2025 के अनुत्तरित… फिर 10 जुलाई 2026 को होगा पौधरोपण महोत्सव; जनता पूछ रही—पेड़ ज्यादा लगे या फाइलों में हरियाली?

मनेन्द्रगढ़/परसगढ़ी। अब्दुल सलाम क़ादरी।

छत्तीसगढ़ में “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान एक बार फिर सुर्खियों में है। 10 जुलाई 2026 को परसगढ़ी में भव्य उत्सव आयोजित किया जा रहा है, जिसमें प्रदेश के मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। लेकिन इस हरियाली के उत्सव पर पुराने सवालों की धूल अब भी जमी हुई है।

व्यंग्य यह है कि पेड़ तो हर साल लगाए जाते हैं, लेकिन उनके हिसाब-किताब की जड़ें शायद इतनी गहरी हैं कि आरटीआई की फावड़ी भी वहां तक नहीं पहुंच पाती।

सूत्रों के अनुसार, पूर्व में “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान में करोड़ों रुपये खर्च होने के आरोप लगे थे। इन आरोपों के संबंध में आरटीआई के तहत जानकारी मांगी गई, लेकिन पूर्व डीएफओ मनेन्द्रगढ़ द्वारा जानकारी उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया गया था। इससे पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े हुए।

अब फिर वही अभियान, वही उत्साह, वही मंच और वही भाषण… लेकिन जनता पूछ रही है कि क्या पिछली बार लगाए गए पौधे आज भी जीवित हैं? कितने पौधे वास्तव में जमीन पर हैं और कितने सिर्फ सरकारी कागजों में हरे-भरे हैं?

सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया जा रहा है कि वन मंडलों में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच पूरी नहीं हो पाती। कुछ सेवानिवृत्त वन अधिकारियों द्वारा भी अनौपचारिक रूप से ऐसे आरोप लगाए जाने की चर्चा है कि कई मामलों में जांच आगे नहीं बढ़ती। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित मंत्री या विभाग की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।

जनता के बीच चर्चा है कि यदि सब कुछ नियमों के अनुसार हुआ है, तो आरटीआई में जानकारी देने में हिचकिचाहट क्यों? आखिर सरकारी धन से चलने वाले अभियान का पूरा लेखा-जोखा सार्वजनिक क्यों नहीं किया जाता?

“पेड़ लगाओ, फोटो खिंचवाओ, तालियां बजवाओ… लेकिन अगर कोई हिसाब पूछ ले तो फाइलों को जंगल में छोड़ आओ।”

10 जुलाई को परसगढ़ी में फिर पौधे लगेंगे, भाषण होंगे, कैमरे चमकेंगे और हरियाली के बड़े-बड़े दावे किए जाएंगे। लेकिन असली सवाल वही रहेगा—क्या इस बार पौधों के साथ पारदर्शिता भी रोपी जाएगी, या फिर जवाबदेही की मिट्टी पहले की तरह बंजर ही रहेगी?

Khabar 30 Din
Author: Khabar 30 Din

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