March 18, 2026 11:54 pm

टैरिफ के बाद ट्रंप ने भारत पर फोड़ा एक और बम, अब भारतीयो पर होगी ये कार्रवाई!

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आयात होने वाले सामान पर 50 फीसदी तक टैक्स बढ़ाने का जो फैसला किया था, वह आज (27 अगस्त) से लागू हो गया है. इससे भारत और अमेरिका के व्यापार संबंधों पर बड़ा असर पड़ेगा और भारत के कई बड़े निर्यातक उद्योगों को नुकसान हो सकता है.

इसी बीच एक और बुरी खबर आई है. द इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप सरकार H-1B वीजा और ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने जा रही है. इसका खास असर भारतीय कर्मचारियों और छात्रों पर पड़ेगा क्योंकि H-1B वीजा का लगभग 70% हिस्सा भारतीयों के पास होता है.

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अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने इस वीजा सिस्टम को धोखाधड़ी बताया है और कहा है कि अब अमेरिका में नौकरी पहले अमेरिकी नागरिकों को दी जाएगी. उनका कहना है कि वर्तमान प्रणाली में ज्यादातर वीजा उन कर्मचारियों को मिलते हैं जिनकी सैलरी अमेरिकी औसत से कम होती है. इसलिए नए बदलावों में उन लोगों को प्राथमिकता मिलेगी जिनकी सैलरी ज्यादा है.

वेतन के आधार पर मिलेगा H-1B वीजा

अभी H1-B वीजा की हर साल 85,000 की लिमिट होती है. इस लिमिट के लिए हर साल एक लॉटरी सिस्टम के जरिए तय किया जाता है कि किस कंपनी के कर्मचारी को वीजा मिलेगा. लेकिन अमेरिकी वाणिज्य मंत्री लुटनिक के मुताबिक, इस लॉटरी सिस्टम को खत्म करके वेतन के आधार पर वीजा देने का तरीका अपनाना होगा. यानी जो कर्मचारी ज्यादा सैलरी लेता है, उसे वीजा मिलने में प्राथमिकता दी जाएगी. इस बदलाव का मसौदा अमेरिका की सरकार के एक खास विभाग ने मंजूर भी कर लिया है. इसका मकसद है कि विदेश से आने वाले वीजा धारक ज्यादा काबिल और अच्छी कमाई करने वाले हों.

इसका सीधा मतलब यह होगा कि कम वेतन वाली नौकरियों में काम करने वाले विदेशी कर्मचारी, जैसे नए स्नातक या छोटे व्यवसायों में काम करने वाले, मुश्किल में पड़ सकते हैं. यह कदम 2021 में भी प्रस्तावित था, लेकिन बाइडेन प्रशासन ने उस समय इसे लागू नहीं किया.

गोल्ड कार्ड लाने वाली है ट्रंप सरकार

इसके अलावा, ट्रंप प्रशासन गोल्ड कार्ड नाम से एक नया प्रोग्राम शुरू करने की तैयारी कर रहा है. यह योजना मेधावी और ज्यादा वेतन पाने वाले कर्मचारियों को पहले वरीयता देगी. इसका मकसद अमेरिका में ग्रीन कार्ड पाने की प्रक्रिया को कड़ा और ज्यादा प्रभावी बनाना है. हालांकि, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि ग्रीन कार्ड का मतलब यह नहीं होगा कि कोई व्यक्ति अमेरिका में हमेशा रह सकेगा. इससे ग्रीन कार्ड धारकों के भविष्य को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं.

भारतीय कर्मचारी और छात्र, जो ज्यादातर H-1B वीजा पर निर्भर हैं, इस बदलाव से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे. आंकड़ों के मुताबिक, हर साल मिलने वाले H-1B वीजा का करीब 70% हिस्सा भारतीयों को ही मिलता है. नए नियमों के मुताबिक, वीजा आवेदन में बायोमेट्रिक जानकारी और आवास का पता जैसे व्यक्तिगत डेटा देना जरूरी होगा. इसके साथ ही कड़ी जांच और ज्यादा कागजी कार्रवाई से वीजा प्रक्रिया और भी मुश्किल हो जाएगी.

Khabar 30 Din
Author: Khabar 30 Din

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