June 16, 2026 12:14 am

सात माह बाद भी नहीं मिला अंश का सुराग, जांच पर उठ रहे सवाल

मोबाइल रिकॉर्ड, वीडियो और दोस्तों की भूमिका की दोबारा पड़ताल की मांग, परिजन हर पहलू से निष्पक्ष जांच करने की मांग

शहडोल। सोहागपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत नवलपुर स्थित सोन नदी में सात माह पहले रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हुए अंश का अब तक कोई पता नहीं चल सका है। समय गुजरने के साथ मामले का रहस्य और गहराता जा रहा है। अंश के परिजन जहां बेटे की तलाश और न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं, वहीं जांच की दिशा और गति को लेकर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। परिजनों का आरोप है कि घटना के शुरुआती दौर में जिन बिंदुओं पर जांच की मांग की गई थी, उन पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई गई। उनका कहना है कि यदि तत्काल तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की गहन पड़ताल होती तो मामले की तस्वीर अब तक साफ हो सकती थी।

दोस्तों से जुड़े पहलुओं पर बढ़ी चर्चा

बताया गया है कि घटना के समय अंश अपने कुछ मित्रों के साथ मौजूद था। ऐसे में उनके बयान, मोबाइल गतिविधियां और आपसी संपर्क जांच के महत्वपूर्ण हिस्से माने जा रहे हैं। परिजनों का दावा है कि संबंधित मोबाइल फोन, कॉल डिटेल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की व्यापक जांच नहीं हुई। इसी तरह घटना से जुड़ा एक छोटा वीडियो भी चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसे लेकर परिवार का मानना है कि उसमें कुछ महत्वपूर्ण संकेत छिपे हो सकते हैं।

रहस्य बरकरार, सवाल कई

सात महीने बाद भी न तो अंश का शव बरामद हो पाया है और न ही जांच किसी ठोस निष्कर्ष तक पहुंच सकी है। ऐसे में यह प्रश्न लगातार उठ रहा है कि यह महज डूबने की घटना थी या फिर इसके पीछे कोई अन्य कारण था। स्पष्ट तथ्य सामने नहीं आने से तरह-तरह की चर्चाएं और आशंकाएं जन्म ले रही हैं।

आर्थिक पहलुओं की जांच की भी उठी मांग

मामले से जुड़े कथित आर्थिक लेन-देन की चर्चाएं भी समय-समय पर सामने आती रही हैं। हालांकि इन दावों की पुष्टि खबर 30 दिन हमारी टीम नहीं करती है लेकिन जानकरों का कहना है कि जांच एजेंसियों को इस पहलू की भी निष्पक्ष पड़ताल करनी चाहिए ताकि किसी भी संभावित कड़ी को नजरअंदाज न किया जाए।

उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज

सूत्रों की माने तो अंश के परिवार ने मामले की पुनः समीक्षा कर आधुनिक तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मोबाइल रिकॉर्ड, उपलब्ध वीडियो, घटनास्थल से जुड़े तथ्यों और संबंधित व्यक्तियों से दोबारा पूछताछ के जरिए मामले की वास्तविकता सामने लाई जा सकती है।

पुराने चर्चित प्रकरणों से हो रही तुलना

स्थानीय स्तर पर इस मामले की तुलना पूर्व के चर्चित जलाशय हादसों से भी की जा रही है, जिनमें परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और विस्तृत जांच के आधार पर महत्वपूर्ण खुलासे हुए थे। ऐसे में लोगों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या अंश प्रकरण में भी जांच का दायरा बढ़ाकर नए तथ्यों तक पहुंचा जा सकेगा।

क्या रहस्य से उठेगा पर्दा

सात माह बाद भी अंश का कोई सुराग नहीं मिलना, तकनीकी साक्ष्यों को लेकर उठते सवाल और परिजनों की लगातार न्याय की मांग, इन सबके बीच अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या मामले की दोबारा और व्यापक जांच से इस रहस्य पर से पर्दा उठ पाएगा।

 

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