July 21, 2026 12:11 pm

CJP की नड्डा से दो बार बातचीत, अमित शाह दिनभर एक्टिव; सरकार को प्रदर्शन में छात्रों की कम भागीदारी का भरोसा क्यों?

पेपर लीक मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ‘संसद चलो’ अभियान से पहले केंद्र सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में थी. संभावित विरोध प्रदर्शन को देखते हुए पहले से ही विस्तृत रणनीति तैयार कर ली गई थी.

नई दिल्ली के संवेदनशील इलाकों, खासकर संसद परिसर के आसपास, सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर कड़ी कर दी गई थी और प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए पुलिस व अर्धसैनिक बलों की व्यापक तैनाती की गई थी.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद सोमवार को पूरे घटनाक्रम की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे थे. उन्होंने गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से समय-समय पर फीडबैक लिया और संसद परिसर व संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की.

पुलिस/पैरामीलिटरी को फोर्स का इस्तेमाल ना करने या जरूरी हो तो कम से कम फोर्स का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया गया था, हालांकि सरकार को शुरुआती इनपुट से यह संकेत मिला था कि ‘संसद चलो’ अभियान में प्रदर्शनकारी छात्रों की संख्या अपेक्षा से कम रह सकती है. इसी आकलन के आधार पर सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की रणनीति तैयार की गई थी.

नड्डा ने CJP प्रतिनिधियों से दो बार मुलाकात क्यों की?

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने दिल्ली में संसद चलो अभियान का आह्वान किया था. इस बीच केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से CJP सदस्यों सौरव दास और आशुतोष रांका से मुलाकात की. सूत्रों का कहना है कि CJP के प्रतिनिधियों और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के बीच दो बार मुलाकात हुई.

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने दिल्ली में संसद चलो अभियान का आह्वान किया था. इस बीच केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से CJP सदस्यों सौरव दास और आशुतोष रांका से मुलाकात की. सूत्रों का कहना है कि CJP के प्रतिनिधियों और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के बीच दो बार मुलाकात हुई.

बताया जा रहा है कि अमित शाह ने विशेष रूप से यह निर्देश दिया था कि यदि हालात पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो जाएं और कानून-व्यवस्था बनाए रखने का कोई दूसरा विकल्प न बचे, तभी न्यूनतम आवश्यक बल का इस्तेमाल किया जाए. इसी रणनीति के तहत पूरे दिन सुरक्षा एजेंसियां सतर्क रहीं और स्थिति के अनुसार कदम उठाती रहीं.

प्रदर्शन करने वालों में छात्रों की संख्या कम क्यों?

सरकारी के मुताबिक अब तक आयोजित तीन प्रमुख परीक्षाओं-नीट (NEET), जेईई (JEE) और सीयूईटी (CUET)-में लगभग 50 लाख से ज्यादा छात्र शामिल हो चुके हैं. इनमें से करीब 10 लाख छात्रों ने साझा परीक्षा में हिस्सा लिया होगा, जबकि 40 लाख से अधिक छात्र देशभर में आयोजित विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं में शामिल हुए हैं.

ऐसे में कई मामलों में काउंसलिंग और प्रवेश प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है. सरकार के आकलन के अनुसार, वास्तविक अभ्यर्थियों का ध्यान इस समय प्रवेश और काउंसलिंग पर केंद्रित है, इसलिए उनके इन विरोध प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में शामिल होने की संभावना अपेक्षाकृत कम मानी जा रही है.

सरकार के सूत्र का ये भी कहना है कि यदि नीट की परीक्षा के रिजल्ट देखे जाएं तो टॉपर्स ज्यादातर पहली बार परीक्षा देने वाले छात्र हैं और इसमें से भी काफी ज्यादा गरीब और निम्न मध्यम बैकग्राउंड से है.

सूत्रों का ये भी कहना है कि परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने के बाद तुरंत जिम्मेदारी लेते हुए एक महीने के अंदर हीं छात्रों के भविष्य की चिंता करते हुए पुनः परीक्षा कराई गई और रिजल्ट भी निकाला गया और जिनसे गलती हुई उनकी जिम्मेदारी भी तय की.

Khabar 30 Din
Author: Khabar 30 Din

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