प्रतीक मिश्रा। रायपुर। सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत सूचना देने में लापरवाही बरतने वाले वन विभाग के अधिकारियों पर छत्तीसगढ़ राज्य मुख्य सूचना आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने गौरेला–पेंड्रा–मरवाही वन मंडल के तत्कालीन जन सूचना अधिकारी (रेंजर) एवं वर्तमान में धमतरी वन मंडल में पदस्थ नरेश चंद्र देवांगन पर ₹25,000 का अधिकतम अर्थदंड लगाया है। साथ ही तत्कालीन प्रथम अपीलीय अधिकारी एवं वनमंडलाधिकारी सत्यदेव शर्मा के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की संस्तुति करते हुए मामला सामान्य प्रशासन विभाग (GAD), रायपुर को भेजा है।
यह आदेश राज्य मुख्य सूचना आयुक्त अमिताभ जैन ने शिकायत प्रकरण क्रमांक C/4334/2023 में 18 जून 2026 को पारित किया।
क्या था पूरा मामला?
खोंगापानी निवासी अब्दुल सलाम कादरी ने 2 फरवरी 2023 को वन विभाग से वर्ष 2022 से 31 जनवरी 2023 तक कैंपा एवं रेगुलर मद के कार्यों से संबंधित प्रमाणक, कैशबुक, गोशवारा रिपोर्ट और अन्य अभिलेखों की जानकारी सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी थी।
निर्धारित समय सीमा में सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद प्रथम अपील की गई, लेकिन वहां भी संतोषजनक निर्णय नहीं मिला। अंततः मामला राज्य सूचना आयोग पहुंचा।
आयोग ने क्या पाया?
सुनवाई के दौरान आयोग ने माना कि जन सूचना अधिकारी ने समय सीमा में सूचना उपलब्ध नहीं कराई और प्रथम अपीलीय अधिकारी ने बिना तथ्यों का समुचित परीक्षण किए आदेश पारित कर दिया। आयोग ने यह भी कहा कि मांगी गई सूचना का कुछ भाग धारा 10 के तहत व्यक्तिगत जानकारी हटाकर उपलब्ध कराया जा सकता था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
₹25 हजार का जुर्माना
आयोग ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 20(1) के तहत तत्कालीन जन सूचना अधिकारी नरेश चंद्र देवांगन पर ₹25,000 का अर्थदंड लगाया है। संबंधित वनमंडलाधिकारी को राशि वसूलकर शासकीय कोष में जमा कराने तथा आयोग को पालन प्रतिवेदन भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रथम अपीलीय अधिकारी सत्यदेव शर्मा पर भी गिरी गाज
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि तत्कालीन प्रथम अपीलीय अधिकारी सत्यदेव शर्मा ने शासन के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया और बिना पर्याप्त परीक्षण के आदेश पारित किया। इस कारण आयोग ने सामान्य प्रशासन विभाग एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक को उनके विरुद्ध विभागीय जांच एवं आवश्यक कार्रवाई करने की संस्तुति की है।
शिकायतकर्ता को सूचना क्यों नहीं मिली?
आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि धारा 18 के तहत दायर शिकायत में सूचना उपलब्ध कराने का आदेश नहीं दिया जा सकता। यदि शिकायतकर्ता सूचना प्राप्त करना चाहते हैं तो उन्हें आरटीआई अधिनियम की धारा 19 के तहत द्वितीय अपील का वैधानिक उपाय अपनाना होगा।
खबर की प्रमुख बातें
- तत्कालीन रेंजर नरेश चंद्र देवांगन पर ₹25,000 का जुर्माना।
- प्रथम अपीलीय अधिकारी सत्यदेव शर्मा के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की संस्तुति।
- आयोग ने सूचना देने में गंभीर लापरवाही मानी।
- शिकायतकर्ता अब्दुल सलाम कादरी की आरटीआई से जुड़ा मामला।
- आदेश 18 जून 2026 को राज्य मुख्य सूचना आयोग द्वारा जारी।
रिपोर्ट: खबर 30 दिन | विशेष अन्वेषण









