देर रात परमट में हंगामे का आरोप, वीडियो बना रहे राहगीर का छीना मोबाइल, अब सवाल- क्या एक गुर्गे की हरकत से ठेकेदार की साख पर लगेगा दाग?

शहडोल। शहर में इन दिनों शराब कारोबार से जुड़े एक कथित गुर्गे की कार्यशैली चर्चा का विषय बनी हुई है। चर्चा है कि निर्धारित समय के बाद देर रात शराब दुकान के पास हुए बिना किसी विवाद के दौरान संबंधित व्यक्ति ने ऐसा व्यवहार किया मानो कानून, नियम और व्यवस्था सब उसकी जेब में रखे हों। प्रत्यक्षदर्शियों की माने तो उसका अंदाज कुछ ऐसा था जैसे संदेश साफ हो हमसे सब करते बनता है।
मोबाइल कैमरा बना सबसे बड़ा दुश्मन
घटनास्थल पर मौजूद एक राहगीर जब पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाने लगा तो कथित तौर पर उसका मोबाइल ही छीन लिया गया। सवाल यह है कि यदि सब कुछ नियमों के अनुसार था, तो कैमरे से इतनी परेशानी क्यों हुई? शहर में यही चर्चा है कि वीडियो से डरने वाले आखिर किस बात को छिपाना चाहते थे।
हत्या तो बिहार के लोग सीखे हैं… जैसी चर्चाओं ने बढ़ाई चिंता
घटना के बाद लोगों के बीच कई तरह की चर्चाएं सुनाई दीं। कुछ लोगों ने व्यंग्य में कहा कि दबंगई का स्तर ऐसा था मानो सामने वाले को यह एहसास दिलाया जा रहा हो कि डरना सीख लो। हालांकि इस तरह की भाषा और व्यवहार को लेकर नागरिकों में नाराजगी भी है। लोगों का कहना है कि कारोबार और गुंडागर्दी दो अलग-अलग चीजें हैं, दोनों को मिलाने का परिणाम अक्सर अच्छा नहीं होता।
मोहर्रम ड्यूटी ने बचाई स्थिति
स्थानीय लोगों का मानना है कि मोहर्रम के मद्देनजर पुलिस की मौजूदगी नहीं होती तो मामला और अधिक गंभीर रूप ले सकता था। पुलिस बल की उपस्थिति ने हालात को नियंत्रण में रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ठेकेदार के लिए मुसीबत न बन जाए मुख्य गुर्गा
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर ऐसे लोगों को खुली छूट कौन दे रहा है? कारोबारी जगत के जानकारों का कहना है कि किसी भी ठेकेदार की पहचान उसके कर्मचारियों और प्रतिनिधियों के व्यवहार से बनती है। यदि कथित गुर्गे की हरकतें इसी तरह सुर्खियां बटोरती रहीं, तो नुकसान किसी राहगीर या आम नागरिक का नहीं बल्कि उस शराब कारोबारी की प्रतिष्ठा का होगा जिसके नाम पर यह दबंगई दिखाई जा रही है।
ब्लैक फॉर्च्यूनर और बाहरी कारोबारियों पर भी उठे सवाल
शहर में देखी गई ब्लैक फॉर्च्यूनर और प्रदेश के बाहर से आए कथित शराब कारोबारियों की गतिविधियों को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। नागरिकों ने मांग की है कि सभी संबंधित लोगों का पुलिस सत्यापन कराया जाए और उनके नेटवर्क की निष्पक्ष जांच हो।
जनता का सवाल
शहर में लगातार चोरी, लूट और असामाजिक गतिविधियों की शिकायतों के बीच आम नागरिक पूछ रहे हैं क्या कानून सिर्फ आम लोगों के लिए है, या फिर कुछ लोगों को यह विशेष छूट मिल चुकी है कि वे देर रात सड़क पर अपना अलग ही शासन चलाएं? यही सवाल अब प्रशासन और पुलिस के सामने भी खड़ा होता दिखाई दे रहा है।









