April 22, 2024 5:21 am

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तेजी से बेकार कानून बनता जा रहा है आरटीआई एक्ट…राज्यों की दुर्दशा देख भड़का सुप्रीम कोर्ट

अब्दुल सलाम क़ादरी

आरटीआई का निपटारा करने में बंगाल फिसड्डी,  झारखंड, छत्तीसगढ़ व ओडिशा का हाल बेहाल..

वर्तमान मासिक निस्तारण दर के आधार पर पश्चिम बंगाल एसआईसी को एक जुलाई 2023 को दायर किसी मामले का निपटान करने में अनुमानित 24 वर्ष और एक महीने का समय लगेगा और इसका निपटान वर्ष 2047 में किया जा सकेगा.
पश्चिम बंगाल सूचना आयोग में यदि अभी कोई अपील या शिकायत दायर की जाती है, तो उसका निस्तारण करने में करीब 24 वर्ष और एक महीने का समय लग जाएगा. आयोग द्वारा अपील के निस्तारण की वर्तमान दर और लंबित मामलों को ध्यान में रखते हुए एक सूचना का अधिकार (आरटीआई) वकालत समूह ने बुधवार (11 अक्टूबर 2023) को अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया. ‘सतर्क नागरिक संगठन’ ने केंद्रीय सूचना आयोग और राज्य सूचना आयोगों के कामकाज का विश्लेषण करने वाली अपनी रिपोर्ट में कहा कि अपील का निस्तारण करने में 10 आयोगों को एक वर्ष या उससे अधिक का समय लगेगा.
एक केस को निबटाने में लगेंगे 24 वर्ष एक महीना
यह रिपोर्ट सूचना का अधिकार अधिनियम की 18वीं वर्षगांठ की पूर्वसंध्या पर प्रकाशित की गई. रिपोर्ट में कहा गया कि आयोगों में औसत मासिक निस्तारण दर और लंबित मामलों के आधार पर अपील/शिकायत को निपटाने में लगने वाले समय की गणना की गई. विश्लेषण से पता चलता है कि वर्तमान मासिक निस्तारण दर के आधार पर पश्चिम बंगाल एसआईसी को एक जुलाई 2023 को दायर किसी मामले का निपटान करने में अनुमानित 24 वर्ष और एक महीने का समय लगेगा और इसका निपटान वर्ष 2047 में किया जा सकेगा.
इन राज्यों में नहीं हैं सूचना आयुक्त
इसमें कहा गया है कि छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र एसआईसी में, निस्तारण के लिए अनुमानित समय चार वर्ष से अधिक है छत्तीसगढ़ में अपीलार्थियों को जानकारी नही मिल रही है तथा ओडिशा और अरुणाचल प्रदेश में यह समय दो वर्ष से अधिक है. रिपोर्ट में कहा गया है कि चार राज्य सूचना आयोग (झारखंड, तेलंगाना, मिजोरम और त्रिपुरा) पूरी तरह से निष्क्रिय हैं, क्योंकि इनमें किसी भी नये आयुक्त की नियुक्ति नहीं की गई है. समूह ने कहा कि छह आयोग (केंद्रीय सूचना आयोग और मणिपुर, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, बिहार और पंजाब के एसआईसी) वर्तमान में बिना मुखिया के कार्य कर रहे हैं.

तेजी से बेकार कानून बनता जा रहा है आरटीआई एक्ट… दुर्दशा देख भड़का सुप्रीम कोर्ट, केंद्र को  निर्देश दिया है ।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्रीय सूचना आयोग हो या राज्य सूचना आयोग, हर जगह सूचना आयुक्तों के पद खाली पड़े हैं। झारखंड में तो एक भी सूचना आयुक्त नहीं है जिस कारण वहां कई महीनों से सूचना आयोग का कार्यालय निष्क्रिय पड़ा है। इस जानकारी पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वो इन पदों पर जल्दी भर्तियां करें।

सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI Act) आया तो ऐसा लगा जैसे सरकारी दफ्तरों से भ्रष्टाचार, लाल फीताशाही, लेट लतीफी जैसी बुराइयां खत्म करने का एक घातक हथियार सीधे जनता के हाथ ही लग गया है। लेकिन अब देश की सर्वोच्च अदालत कह रही है कि आरटीआई एक्ट की धार बड़ी तेजी से भोथरी होती जा रही है और यह एक बेकार से कानून की श्रेणी में तब्दील होता जा रहा है। तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार ने शासन-प्रशासन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के मकसद से सार्वजनिक प्राधिकरणों को इस दायित्व से बांध दिया गया था कि यदि आम कोई जानकारी मांगे तो उसे सुगमता से मुहैया कराई जाए। लेकिन दुर्भाग्य से इसकी ऐसी दुर्दशा हो गई है कि सुप्रीम कोर्ट को भी निराशा जतानी पड़ी। सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले साल ही कहा था कि केंद्रीय सूचना आयोग और राज्य सूचना आयोगों में पद खाली हैं जिस कारण वो जनता की शिकायतों दूर करने में असमर्थ हैं।
तीन सदस्यीय पीठ के सामने बताया था आरटीआई का हाल

वकील प्रशांत भूषण ने प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायधीश जेबी पारदीवाला और न्यायाधीश मनोज मिश्रा की पीठ के सामने सामाजिक कार्यकर्ता अंजली भारद्वाज की याचिका पर दलील दी। उन्होंने बताया कि सीआईसी में सूचना आयुक्तों के 11 पदों में से सात खाली हैं और मौजूदा सूचना आयुक्त नवंबर में रिटायर होने वाले हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सूचना आयोग और भी बुरी स्थिति में हैं। झारखंड राज्य सूचना आयोग मई 2020 से ही काम नहीं कर रहा है क्योंकि सूचना आयुक्तों के सभी 11 पद खाली हैं। तेलंगाना राज्य सूचना आयोग में सूचना आयुक्तों के सभी पद फरवरी जबकि

त्रिपुरा में जुलाई 2021 में खाली हो गए

राज्यों ने सूचना आयोगों में रिक्तियां नहीं भरकर आरटीआई अधिनियम को एक बेकार कानून बना दिया है।
सुप्रीम कोर्ट

नाराज सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को दिया निर्देश

पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी को निर्देश दिया कि वो केंद्र सरकार को सूचना आयुक्तों के स्वीकृत पदों, रिक्तियों की संख्या,  वर्ष 2024 में 31 मार्च तक जो रिक्तियां होंगी, उन सब के आंकड़े जुटाएं। साथ ही, केंद्र को आरटीआई एक्ट के तहत इन निकायों के सामने लंबित शिकायतों और अपीलों से संबंधित जानकारी एकत्र करने का निर्देश भी देने को कहा। इसने केंद्र से तीन सप्ताह में एक रिपोर्ट मांगी। सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र और राज्यों को भी निर्देश दिया कि वे रिक्तियों की अधिसूचना जारी करने और उन्हें भरने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए तत्काल कदम उठाएं। सुप्रीम कोर्ट बेंच ने कहा, ‘राज्यों ने सूचना आयोगों में रिक्तियां नहीं भरकर आरटीआई अधिनियम को एक बेकार कानून बना दिया है।’

इसलिए आया था आरटीआई एक्ट

आरटीआई अधिनियम 15 जून, 2005 को लागू हुआ और इसका उद्देश्य ‘हर सार्वजनिक प्राधिकरण के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक प्राधिकरणों के नियंत्रण में सूचना तक पहुंच सुरक्षित करने के लिए नागरिकों के लिए सूचना के अधिकार का व्यावहारिक शासन स्थापित करना, केंद्रीय सूचना आयोग और राज्य सूचना आयोगों का गठन करना और उससे जुड़े या उससे संबंधित मामलों के लिए’ था।

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