June 16, 2024 11:41 pm

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सूरजपुर वन मण्डल के रामानुजनगर वन परीक्षेत्र में हुआ प्लांटेशन के नाम पर करोणों का घोटाला

अब्दुल सलाम कादरी-बीबीसी लाईव, खबर 30 दिन (एडिटर इन चीफ)

रायपुर/सूरजपुर वन मण्डल के रामानुजनगर वन परीक्षेत्र में हुआ प्लांटेशन के नाम पर करोणों का घोटाला, फर्जी मजदूरी भुगतान और फर्जी बाउचरो का कमाल..?क्या हो पाएगी जांच? 100 परसेंट रोपड़ पौधों में मात्र 20,25 प्रतिशत ही जीवित बचे है?

जब लकड़हारे के हाथ जंगल की सुरक्षा दे दी जाए तो जंगल का अंजाम समझा जा सकता है। सूरजपुर वन मंडल के रामानुजनगर जंगल में 2019 से 2023-24 तक हुए प्लान्टेशनो और निर्माण कार्य मे वन अधिकारियों का रवैया भ्रष्टाचार रूपी कोढ़ में खाज की भूमिका निभा रहा है।

इतने से भी मन नहीं भर रहा तो सफेदपोशों और चंद नेताओं के संरक्षण में जंगल को तबाह करने पर महकमे के ही कुछ लोगों सहित ठेकेदार भी तुले हुए हैं।

ठेका चमकाने के लिए तरह-तरह के साधनों-संसाधनों का उपयोग और एप्रोच लगाकर अपनी गड़बड़ियों को छिपाने के लिए साम-दाम-दण्ड-भेद की नीति अपनाने तत्पर हैं।

रेंजर द्वारा अपने पदीय दायित्वों के प्रति कर्तव्य हीनता और शासन के प्रति गैर जिम्मेदाराना रवैया अपनाने वालों के कारण जंगलों के लिए कैम्पा और नरवा विकास मद से मिलने वाले भारी-भरकम राशि का बहुत कम उपयोग कर अपनी जेब में भरा गया है।

इस तरह के मामले पहले भी कई बार सामने आ चुके हैं, विधानसभा में सवाल भी उठते हैं,सदन को गुमराह तक किया गया है लेकिन कार्यवाही के नाम पर नतीजा सिफर है।

अपने निजी लाभ और अतिरिक्त धन कमाने की लालच में प्लान्टेशनो के नाम पर पौधे रोपड़ में अपने ही वनों का सत्यानाश करने में कोई कोर- कसर नही छोड़ी है।

पौधों की ढुलाई, पौधों की खरीदी, एवं प्लान्टेशनो में लगने वाले अन्य सामग्रियों की खरीदी में फर्जी बाउचर और फर्जी मजदूरी दिखाकर भुगतान ले लिया जाएगा।

सूरजपुर वनमंडल के रामानुजनगर में वर्ष 2019 से 2024 तक लाखों- करोड़ों की लागत से कई प्रकार के कार्य कराया गया है, जिसे विभाग द्वारा अपने चहेते अघोषित ठेकेदार के माध्यम से आधा-अधूरा कार्य कराकर भ्रष्ट्राचार को अंजाम दिया जाता है। सूरजपुर वनमंडल के रामानुजनगर में पिछले 2019 से 2023-24 वित्तीय वर्षों के अंतराल में कराए गए अथवा वर्तमान कराए जाने वाले कार्यों की निष्पक्ष एजेंसी से जांच करायी जाए तो चौकाने वाले भ्रष्ट्राचार का खुलासा हो सकता है।

विभागीय सूत्र बताते हैं कि वन एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए वर्ष 2004 से स्थापित कैंपा मद की राशि का उपयोग वनीकरण एवं वन्य जीव संरक्षण के लिए ही किया जाना होता है।

वनमंडल में कैम्पा नियम तोड़कर करोड़ो रूपये के स्तरहीन तालाब, सड़क एवं अन्य कार्य कराए गए हैं?

वन विभाग और जंगलों में रहने वाले आदिवासियों को तो कोई फायदा नही हुआ, बल्कि मुनाफा संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों ने जंगल के संसाधनों की चोरी कर कमा लिया?

निविदा व भंडार क्रय अधिनियम का पालन नहीं..

विभागीय सूत्रों के ही मुताबिक नियमतः वनमंडल में होने वाले निर्माण कार्य में भंडार क्रय अधिनियम का पालन करते हुए विभाग को निविदा जारी कर सप्लायरों से अनुबंध कर निर्माण सामाग्री क्रय करना होता है, न कि वनों से पत्थर, गिट्टी, मिट्टी या मुरुम का खनन किया जाता है। इसके विपरीत वनमंडल में बैठे शीर्ष से निचले स्तर के अधिकारियों द्वारा जंगल को तबाह कर भ्रष्ट्राचार का खेला किया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार मनरेगा की तरह कैम्पा मद से राजस्व जमीन पर काम कराने पर सोशल आडिट का प्रावधान है। इसके लिए पंचायत में समिति बनाने के साथ ही योजना की जानकारी देने का प्रावधान है। ग्राम सभा की बैठक लेकर जानकारी देना व 3 सदस्यों का चयन, कार्य की लागत, मापदंड, मजदूरी भुगतान की दर पढ़कर सुनाना, किये गए कार्यों की मात्रा व मापको का परीक्षण कराना, सरपंच द्वारा ग्राम सभा लेकर मूल्यांकन प्रतिवेदन डीएफओ को प्रस्तुत करना, परियोजना के लिए प्रोजेक्ट अधिकारी की नियुक्ति डीएफओ द्वारा करना, डिप्टी रेंजर या परिसर रक्षक के साथ ही अलग से अधिकारी भी नियुक्त करना होता है, लेकिन सूरजपुर वनमंडल के अधिकारियों द्वारा ऐसा किया जाना मुनासिब नही समझा जाता।

प्लान्टेशनो और निर्माण कार्यों से संबंधित सूचना बोर्ड गायब..

कैम्पा “वनारोपण निधि प्रबंधन व योजना प्राधिकरण” के तहत क्षतिपूरक वनीकरण, जलग्रहण प्रबंधन, क्षेत्र का उपचार, वन्य जीव प्रबंधन, वनों में आग लगने से रोकने के उपाय, वन में मृदा व आर्द्रता संरक्षण के कार्य कराए जाते हैं। इसके तहत नालों में स्टापडेम, बोल्डर चेकडेम, तालाब का निर्माण, पौधारोपण, फेंसिंग समेत अन्य कार्य होते हैं किंतु उक्त कार्यो से संबंधित जानकारी किसी को पता न चले इसलिए ज्यादातर निर्माण स्थलों में सूचना बोर्ड नहीं लगाया जाता।

माननीय रेंजर साहब से जब मात्र दो तीन सालों के प्लान्टेशनो की जानकारी आरटीआई के तहत मांगी गई तो साहब के हाथ पांव फूलने लगे और अपनी विभागीय पकड़ और राज्य सूचना आयोग में बाबुओं से सांठ गांठ के चलते जानकारी देने से बचने का प्रयास किया गया है लेकिन साहब को ये नही पता कि उक्त जानकारी के दस्तावेज हमारे पास पहले से ही मौजूद है और उक्त पत्रों का हवाला देते हुए केंद्रीय कैम्पा के सीईओ को बकायदा शिकायत पत्र भेजने की तैयारी की जा रही है ताकि रामानुजनगर वन परीक्षेत्र में हुए वित्तीय अनियमितता के आधार पर रिकवरी कराई जा सके…
जिन कार्यो की शिकायत दिल्ली सीईओ कैम्पा में किया जाना है उनकी सुचि अगली खःबर के माध्यम से आपके सामने प्रस्तुत करेंगे ताकि सच्चाई आम नागरिकों तक पहुँच सके।

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