बलपुरवा की घटना के बाद भी संवेदनशील इलाकों में गश्त पर सवाल, कोतवाली पुलिस की घेरे में सूचना संकलन व्यवस्था
शहडोल। कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत गुरुनानक चौक में बुधवार रात उस समय भगदड़ की स्थिति निर्मित हो गई, जब बुल्ला साहू और लकी साहू पर कथित रूप से हमला करने का प्रयास किए जाने की जानकारी सामने आई। बताया जा रहा है कि दोनों ने समय रहते स्थिति को भांपते हुए सूझबूझ का परिचय दिया, जिससे संभावित बड़ी वारदात टल गई। घटना की जानकारी सामने आने के बाद क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। सूत्रों की माने तो विवाद को वर्चस्व और आंतरिक व्यापारिक लेन-देन से जोड़कर देखा जा रहा है लेकिन पुष्टि हम नहीं करते है। जानकारों की माने तो म शिकायत थाने तक पहुंचने गई है लेकिन शिकायत से संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। ऐसे में विवाद की वास्तविक वजह और घटनाक्रम को लेकर फिलहाल स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो रही है।
बलपुरवा के बाद फिर उठे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
बलपुरवा में हुई घटना के बाद शहर की कानून-व्यवस्था और पुलिस की गश्त को लेकर पहले ही सवाल उठ चुके हैं। इसके बावजूद गुरुनानक चौक जैसे व्यस्त और प्रमुख स्थान पर हमले की कोशिश की घटना सामने आने से पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि शहर के प्रमुख चौराहों और संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित पुलिस गश्त दिखाई देनी चाहिए। जिससे समय रहते पुलिस की मौजूदगी कई विवादों को बढ़ने से रोक सकती है और असामाजिक तत्वों में कानून का भय भी कायम रह सकता है।
सूचना संकलन और बीट व्यवस्था पर भी सवाल
उक्त घटना के बाद कोतवाली थाना क्षेत्र में सूचना संकलन व्यवस्था और बीट प्रभारियों की सक्रियता को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। यदि किसी क्षेत्र में विवाद या तनाव की स्थिति पहले से बन रही थी, तो इसकी जानकारी पुलिस के स्थानीय सूचना तंत्र तक क्यों नहीं पहुंची, यह सवाल अब उठने लगा है। एक ओर पुलिस अधीक्षक द्वारा साइबर ठगी पर अंकुश लगाने के लिए जिले के 14 थानों में साइबर संबंधी कार्रवाई और व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर मुख्यालय क्षेत्र में इस तरह की घटनाओं की चर्चा पुलिस की प्राथमिकताओं और मैदानी निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।
गश्त बढ़ाने की मांग
गुरुनानक चौक की घटना के बाद स्थानीय नागरिकों ने प्रमुख बाजारों, चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की गश्त बढ़ाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि पुलिस की मौजूदगी न केवल संभावित घटनाओं को रोक सकती है बल्कि किसी विवाद के गंभीर रूप लेने से पहले ही स्थिति को नियंत्रित करने में मददगार साबित होगी।









