August 14, 2026 10:29 am

जम्मू-कश्मीर में बिगड़े हालात… रियासी में भूस्खलन से 7 की मौत, रामबन में बादल फटने से 4 लोगों की गई जान

जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले के राजगढ़ इलाके में भारी बारिश और ऊपरी इलाकों में बादल फटने से एक बार फिर से फ्लैश फ्लड की स्थिति बन गई है. इस घटना में अब तक 4 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 4 लोग लापता बताए जा रहे हैं.

वहीं रियासी जिले के महौर क्षेत्र में लगातार भारी बारिश के चलते भूस्खलन की घटनाएं सामने आई हैं. शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार मलबे से अब तक 7 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है.

प्रशासन के अनुसार कई मकानों को नुकसान पहुंचा है, जिनमें से कुछ पूरी तरह बाढ़ के पानी में बह गए. हालात को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है. रेस्क्यू टीमें प्रभावित इलाकों में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं ताकि लापता लोगों को तलाशा जा सके. साथ ही प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी राहत केंद्र बनाए गए हैं.

अधिकारियों ने कहा कि हालात पर नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त टीमें भी भेजी जाएंगी. लगातार हो रही भारी बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की अपील की है. वहीं रियासी भूस्खलन की घटना में स्थानीय प्रशासन और रेस्क्यू टीमें मौके पर राहत-बचाव अभियान चला रही हैं.

 

 

जम्मू-कश्मीर में लगातार बादल फटने की घटना और फ्लैश फ्लड

अगस्त 2025 में जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में भारी तबाही मची है. इस महीने में प्रदेश को लगातार फ्लैश फ्लड और लैंडस्लाइड्स का सामना करना पड़ा, जिससे खासतौर पर जम्मू क्षेत्र में बड़ी तबाही हुई. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले हफ्ते में आई भीषण बारिश ने जम्मू, सांबा, कठुआ, रियासी और डोडा जिलों में तबाही मचाई. इन घटनाओं में अब तक 36 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. सिर्फ रियासी और डोडा जिलों में ही कम से कम 9 लोगों की जान गई. भारी बारिश से भूस्खलन हुए, नदियों का जलस्तर बढ़ गया और कई गांवों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई.

इससे पहले, 14 अगस्त को किश्तवाड़ जिले के चिशोटी गांव में एक बादल फटने की घटना हुई थी. यह इलाका माता वैष्णो देवी यात्रा के मार्ग पर स्थित है और समुद्र तल से 9,000 फीट की ऊंचाई पर बसा है. इस क्लाउडबर्स्ट में कम से कम 60 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई लोग घायल और लापता बताए गए. तेज फ्लैश फ्लड्स ने श्रद्धालुओं के कैंप, मकान और पुल बहा दिए. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इलाके में सामान्य बारिश ही दर्ज हुई थी, लेकिन क्लाउडबर्स्ट की वजह से सीमित क्षेत्र में अचानक पानी का सैलाब आ गया.

क्लाउडबर्स्ट क्या है?

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, किसी छोटे क्षेत्र (20-30 वर्ग किलोमीटर) में एक घंटे में 10 सेंटीमीटर या उससे ज्यादा बारिश को क्लाउडबर्स्ट कहा जाता है. यह घटना अक्सर पहाड़ी इलाकों में होती है. मॉनसून की नमी से भरी हवाएं जब पहाड़ों से टकराकर ऊपर उठती हैं, तो ठंडी होकर घने बादल बना देती हैं.

इनमें जब पानी का भार असहनीय हो जाता है तो अचानक भारी बारिश के रूप में गिरता है. इस अचानक बारिश से मिनटों में फ्लैश फ्लड, लैंडस्लाइड और मडफ्लो जैसी स्थितियां पैदा हो जाती हैं. वैज्ञानिक मानते हैं कि क्लाइमेट चेंज की वजह से इस तरह की घटनाओं की संख्या और तीव्रता दोनों बढ़ रही हैं.

Khabar 30 Din
Author: Khabar 30 Din

विज्ञापन
Advertisement
error: Content is protected !!