स्थानांतरण और न्यायालय से स्टे के बाद अब अधिवक्ता की शिकायत, अस्पताल की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
भोपाल/शहडोल। सिविल अस्पताल जयसिंहनगर के बीएमओ आनंद प्रताप सिंह का कार्यकाल एक बार फिर चर्चाओं में है। पिछले वर्ष सितंबर माह में स्थानांतरण को लेकर मामला सुर्खियों में आया था। बताया गया था कि जनप्रतिनिधियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर स्थानांतरण पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद बीएमओ द्वारा न्यायालय की शरण लेकर स्थगन आदेश प्राप्त किए जाने की भी चर्चा रही। अब लगभग साल भर पूरा होने से पहले अस्पताल की व्यवस्थाओं और कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं।
अधिवक्ता ने डॉक्टरों पर लगाया अभद्रता का आरोप
ताजा मामला अधिवक्ता संध्या तिवारी से जुड़ा बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता ने संध्या तिवारी ने बताया कि पेट दर्द की शिकायत को लेकर उपचार कराने सिविल अस्पताल पहुंची थीं, अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों द्वारा उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। मामले को लेकर उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराईकराई लेकिन शिकायत के करीब 10 दिन बीत जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही है। कार्रवाई नहीं होने से नाराज अधिवक्ता संध्या तिवारी ने अब कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक का दरवाजा खटखटाया और शिकायत कर मामले में कार्रवाई की मांग की है। बहरहाल देखना होगा कि शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा संज्ञान में लेने के बाद कार्रवाई कब होगी।
समाचार प्रकाशित होने के बाद पत्रकार को धमकाने का आरोप
इसी बीच अस्पताल से जुड़े मामले में समाचार प्रकाशित किए जाने के बाद पत्रकार को कथित रूप से धमकाने और प्रसारित खबर को हटाने के लिए दबाव बनाए जाने की चर्चाएं भी सामने आई है। यदि ऐसा हुआ है तो यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय माना जाएगा। इस संबंध में संबंधित पत्रकार द्वारा कोई औपचारिक शिकायत अभी तक नहीं की गई है लेकिन जल्द साक्ष्यों के साथ वरिष्ठ अधिकारियों से की शिकायत की जाने की बात आई है और इसमें कथित धमकाने में शामिल गिरोह के गुर्गों को भी चिन्हित कर जल्द खुलासा किये जाने की बात सामने आई है।
प्रमाण पत्रों और अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी चर्चा
सूत्रों की माने तो अस्पताल में एक बार फिर जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र एवं मेडिकल प्रमाण पत्र से जुड़े कार्यों को लेकर भी हितग्राहियों से कथित लेन-देन की चर्चाएं क्षेत्र में बनी हुई हैं। ज्ञात हो कि बीएमओ के नई पदस्थापना के बाद भी यह चर्चा जोर पकड़ा था और कई हितग्राहियों का वीडियो का सामने आया था लेकिन फिर एक बार इस शाखा के प्रभारी पर सवाल उठ रहा है कि कैसे वीडियो वायरल के बाद भी इनको प्रभार दिया गया है।









