मुंबई। महाराष्ट्र में सीएम कौन होगा कौन नहीं होगा इससे भी बड़ा सवाल महायुति में पावर किसकी ज्यादा होगी इसको लेकर जंग छिड़ती नजर आ रही है। भले ही सीएम और डिप्टी सीएम की खींचतान खत्म हो गई, मगर असल लड़ाई तो अब शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी के बीच है। यह लड़ाई है आखिर महायुति में मझला भाई कौन। यानी महायुति में दूसरे नंबर की पार्टी कौन, किसे अधिक कैबिनेट बर्थ मिलेगा? दरअसल, महाराष्ट्र चुनाव में भाजपा के खाते में 132 सीटें गईं। इस तरह न वह केवल महाराष्ट्र की सिंगल लार्जेस्ट पार्टी है, बल्कि महायुति में बड़ा भाई भी है। भाजपा बड़ा भाई है, यह क्लियर है। मगर मझले भाई यानी सेकेंड नंबर की पार्टी को लेकर अब शिंदे की शिवसेना और अजित गुट की एनसीपी में खींचतान हो रही है। सीएम-डिप्टी सीएम की लड़ाई भले ही खत्म हो गई। पर महायुति में नंबर 2 की लड़ाई जारी है। अजित गुट की एनसीपी ने शिंदे की शिवसेना को नंबर 3 पार्टी बताया है। एनसीपी नेता छगन भुजबल का कहना है कि एनसीपी का स्ट्राइक रेट अच्छा है। इसलिए शिंदे की शिवसेना नंबर तीन और एनसीपी नंबर 2 पार्टी हुई। यह दलील देकर एनसीपी ने शिंदे की जितनी या उससे अधिक पोर्टफोलियो की मांग की है।
दिलचस्प है कि महायुति में सबसे कम सीटें आने के बावजूद अजित पवार की एनसीपी एनकनाथ शिंदे की शिवसेना के बराबर मंत्री पदों पर अड़ी हुई है। हाल ही में हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 132, शिवसेना को 57 और एनसीपी को 41 सीटें मिली थीं। इस तरह 230 सीटों के साथ महायुती ने सरकार बनाई है। 132 सीट लेकर भाजपा बड़ा भाई बनी हुई है। नंबर 2 के लिए एनसीपी और शिवेसना में खींचतान है।सूत्रों का दावा है कि महायुति सरकार में अजित पवार की एनसीपी को एकनाथ शिंदे की शिवसेना से कम ही मंत्रिमंडल मिलेंगे। सूत्रों के मुताबिक भाजपा अपने पास 20 से 22 पोर्टफोलियो रखेगी। एनकाथ शिंदे कैंप वाली शिवसेना को 10 से 12 पोर्टफोलियो मिल सकते है। वहीं, अजित पवार वाली एनसीपी को 8 से 10 पोर्टफोलियो मिल सकते हैं। अजित पवार गुट भी उतने ही पोर्टफोलियो मांग रहा है, जितने शिंदे कैंप को मिले हैं।
मगर बीजेपी और शिंदे कैंप उस पर राजी नहीं है। सूत्रों का दावा है कि एकनाथ शिंदे ने साफ कह दिया है कि महायुति में शिवसेना ही दूसरे नंबर की पार्टी है। जी हां, सीएम पद की रेस में अजित पवार की एनसीपी कहीं नहीं है। वह डिप्टी सीएम पद पाकर ही खुश है। मगर उसकी असल लड़ाई अब शिंदे की शिवसेना से है। यही वजह है कि अजित पवार की एनसीपी भाजपा पर शिंदे की शिवसेना से अधिक पोर्टफोलियो दिए जाने का दबाव बना रही है। एनसीपी के सीनियर नेता अधिक से अधिक कैबिनेट मंत्री पदों के लिए दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। एनसीपी प्रमुख अजित पवार, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे और दूसरे वरिष्ठ नेता पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में हैं। ये नेता कैबिनेट गठन पर चर्चा करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलना चाहते हैं। एनसीपी शिवसेना के बराबर मंत्री पद चाहती है। महाराष्ट्र में दूसरी बार महायुती की सरकार बनी है।
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महायुति में असली लड़ाई: शिंदे और अजित पवार में किसकी पावर ज्यादा?
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