प्रतीक मिश्रा
शहडोल। जिला मुख्यालय से सटे गोरतरा सहित अन्य गांव में अवैध ईंट भट्ठों का संचालन लंबे समय से जारी है जिससे क्षेत्र में प्रदूषण और जनस्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आ रही हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि बिना आवश्यक अनुमति और पर्यावरणीय मानकों का पालन किए भट्ठों का संचालन खुलेआम किया जा रहा है, जबकि जिम्मेदार विभाग निष्क्रिय बने हुए हैं।
नियमों की अनदेखी, प्रदूषण का बढ़ता स्तर
जानकारों के माने तो संचालित भट्ठों के पास न तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की स्वीकृति है और न ही खनन से संबंधित आवश्यक अनुमति। आधुनिक तकनीकों की जगह पारंपरिक और अधिक प्रदूषणकारी तरीकों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे कोयले का अत्यधिक धुआं पूरे क्षेत्र में फैल रहा है।
पर्यावरण और खेती पर असर
भट्ठों से निकलने वाला धुआं और राख आसपास के वातावरण को प्रभावित कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इसका सीधा असर कृषि पर पड़ रहा है, जिससे फसलों की गुणवत्ता में गिरावट देखी जा रही है। क्षेत्र में वायु गुणवत्ता लगातार खराब होती जा रही है।
स्वास्थ्य पर बढ़ता खतरा
ग्रामीणों ने बताया कि बच्चों और बुजुर्गों में सांस संबंधी बीमारियां, खांसी और एलर्जी के मामलों में वृद्धि हुई है। लगातार प्रदूषित वातावरण में रहने से लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
कानूनी प्रावधानों की अनदेखी
नियमानुसार ईंट भट्ठा संचालन के लिए पर्यावरणीय अनुमति, खनन स्वीकृति और अन्य आवश्यक दस्तावेज अनिवार्य होते हैं। उल्लंघन की स्थिति में सख्त कार्रवाई का प्रावधान है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका पालन नहीं हो रहा।
कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने मीडिया वे माध्यम से विभागीय अमले से कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा है कि यह मुद्दा केवल एक गांव तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से जुड़ा है।








