February 2, 2026 12:39 pm

पटना के आलमगंज में मिला 500 साल पुराना शिव मंदिर, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़

पटना: पटना में भी अब खुदाई के दौरान एक सालों पुराना शिव मंदिर मिला है. यह खूबसूरत भव्य मंदिर जमीन के नीचे था, जो कि सालों से कचरे का ढेर से ढक चुका था. जमीन किसी मठ के नाम पर छोड़ी गई थी. मंदिर के बारे में अंदाजा लगाया जा रहा है कि ये 15वीं शताब्दी का हो सकता है जो कि लगभग 500 साल पुराना मंदिर का अवशेष है. यह मंदिरनुमा आकृति है, जिसमें एक शिवलिंग और दो पदचिह्न पाए गए हैं. आश्चर्य की बात यह है कि स्थानीय लोगों ने अधिकारी के आने से पहले ही इस स्थल की खुदाई की और साफ-सफाई करने के बाद यहां पूजा-पाठ शुरू कर दिया.

खास धातु से बना है मंदिर

यह मंदिर आलमगंज थाना क्षेत्र के नारायण बाबू की गली के पास खुदाई के दौरान मिला. रविवार दोपहर को वहां की जमीन अचानक से धंसने लगी. लोगों ने जब वहां सफाई की तो उन्हें पुराने मंदिर का ऊपरी हिस्सा दिखाई दिया. जमीन की और खुदाई करने पर करीब पांच फुट ऊंचा मंदिर निकला. इस मंदिर के अंदर काले पत्थर का एक चमकदार शिवलिंग भी स्थापित था. मंदिर के स्तंभों पर सुंदर नक्काशी भी देखी गई.

मंदिर के बारे में स्थानीय लोगों ने बताया कि यह मंदिर किसी खास धातु का है. इससे लगातार पानी निकल रहा है. कितना भी कपड़े से पोछों वह रिसता ही रहता है. चिकने काले पत्थर का मंदिर है. उसी मंदिर में शिवलिंग और पदचिह्न हैं. जैसे ही लोगों ने मंदिर को देखा जयकारे लगाने लगे. स्थानीय लोगों ने बढ़चढ़कर मिट्टी निकालने का काम किया. लोगों ने कहा कि मंदिर कितना साल पुराना होगा यह हमें नहीं पता लेकिन इसकी बनावट बता रही है कि ये प्राचीन शिव मंदिर है. पहले यहां पर कचरा फेंका जाता था.

पूजा-अर्चना का सिलसिला जारी

जमीन के भीतर मिली मंदिरनुमा आकृति में शिवलिंग और दो पदचिह्नों की खोज से इस स्थल का ऐतिहासिक महत्व बढ़ गया है. हालांकि, इस मंदिर के अवशेषों के पुरातन होने या इसके सही समय की पहचान के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है. यह मंदिर कितने साल पुराना है, इस पर अभी भी संशय बना हुआ है. मगर, यह जगह अब एक धार्मिक स्थल बन चुकी है और यहां पूजा-अर्चना का सिलसिला जारी है. लोगों ने आपसी सहयोग से मंदिर की सफाई और जीर्णोद्धार का काम शुरू कर दिया है. स्थानीय लोगों का कहना है कि वे इस प्राचीन मंदिर को फिर से अपने पुराने स्वरूप में लाएंगे.

Khabar 30 Din
Author: Khabar 30 Din

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