पटना । बिहार की जातिगत गणना को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी का बदला हुआ रुख सियासी हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। हाल ही में पटना में आयोजित ‘संविधान सुरक्षा सम्मेलन’ में राहुल गांधी ने बिहार में हुई जातिगत गणना को ‘फर्जी’ करार दिया। राहुल गांधी का कहना था कि इस प्रक्रिया के जरिये राज्य की जनता को गुमराह किया गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान ने न सिर्फ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बल्कि तब सरकार में उपमुख्यमंत्री रहे तेजस्वी यादव को भी राजनीतिक रूप से असहज कर दिया है।
2024 के शुरुआती दिनों में, राहुल गांधी ने जातिगत गणना का श्रेय तेजस्वी और कांग्रेस के दबाव को दिया था। उन्होंने जनगणना करने को बीजेपी के खिलाफ महागठबंधन की बड़ी जीत बताया था। लेकिन अब, ठीक विधानसभा चुनावों से पहले, राहुल गांधी के बयान पूरी तरह बदल गया है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस जातीय जनगणना की सबसे बड़ी पैरोकार है और जातिगत जनगणना को पूरे देश में लागू करेगी।
जहां राहुल गांधी के बयान को केवल नीतीश के खिलाफ नहीं, बल्कि तेजस्वी पर भी अप्रत्यक्ष हमला बताया जा रहा है। क्योंकि तेजस्वी ने जातिगत गणना को अपनी सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया था। लेकिन अब राहुल गांधी इसी जातिगत जनगणना को फर्जी करार देकर तेजस्वी की उपलब्धि को कमजोर करने की कोशिश करते दिख रहे हैं।
दरअसल बिहार की राजनीति में इस बदलाव को लेकर सवाल उठने लाजिमी हैं। क्या यह राहुल गांधी की लालू और तेजस्वी यादव के साथ सियासी दबाव बनाने की रणनीति है? या यह इंडिया ब्लॉक में नेतृत्व को लेकर बढ़ती खींचतान का संकेत है?
दिल्ली चुनावों में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) के बीच साफ-साफ टकराव देखने को मिला सकता है। वहां कांग्रेस अपने दम पर चुनाव लड़ रही है, जबकि आप को ममता बनर्जी और अखिलेश यादव का समर्थन मिला हुआ है। अब सवाल उठता है कि क्या बिहार में भी कांग्रेस इसी राह पर चलेगी और अपने दम पर चुनाव लड़ने का फैसला करेगी?
हाल फिलहाल कांग्रेस के बदले हुए रुख से यह संभावना बनती दिख रही है कि पार्टी आने वाले विधानसभा चुनावों में सीटों के बंटवारे में ज्यादा हिस्सेदारी मांग सकती है। राहुल गांधी ने हाल ही में क्षेत्रीय दलों को विचारधारा के अभाव वाला बताया था, इससे कांग्रेस को “राष्ट्रीय पार्टी” के रूप में बड़ी भूमिका मिल सके।
दरअसल लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी का यह बयान नीतीश और तेजस्वी यादव के लिए बिहार विधानसभा चुनाव में नई चुनौती है। खासकर तब, जब बिहार में बीजेपी पहले ही नीतीश के जातिगत समीकरणों को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।
राहुल गांधी के जातिगत गणना पर बदले हुए रुख ने बिहार की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। यह न केवल इंडिया ब्लॉक के भीतर बढ़ते तनाव को दिखाता है, बल्कि कांग्रेस की बढ़ती महत्वाकांक्षाओं को भी सामने लाता है। अब देखना यह होगा कि यह बयानबाजी गठबंधन को मजबूत करेगी या बिहार में राजनीतिक समीकरणों को और उलझा देगी।
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राहुल गांधी ने बिहार में हुई जातिगत गणना को बताया ‘फर्जी’, क्या तेजस्वी की उपलब्धि पर पानी फेरने की कोशिश
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