- तालाब, स्टॉपडैम, फेंसिंग और पौधारोपण कार्यों की जांच अब तक लंबित, शिकायतकर्ता ने उठाए गंभीर सवाल
मनेन्द्रगढ़। मनेन्द्रगढ़ वन मण्डल में करोड़ों रुपये के विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायतकर्त एवं स्वतंत्र पत्रकार अब्दुल सलाम क़ादरी का आरोप है कि वन विभाग में कराए गए कई निर्माण एवं पौधारोपण कार्यों की जांच लंबे समय से लंबित है, जबकि बार-बार शिकायतें और जांच की मांग की जा चुकी है।

शिकायत के अनुसार खोंगापानी, मनेन्द्रगढ़, घुटरा, नारायणपुर, छिपछिपी सहित कई वन क्षेत्रों में जेसीबी मशीनों से तालाब निर्माण, स्टॉपडैम, मुनारा निर्माण, फेंसिंग तथा पौधारोपण के लिए गड्ढों की खुदाई में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। आरोप है कि कई कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं किए गए, लेकिन अब तक उनकी निष्पक्ष जांच नहीं हो सकी।
“मौखिक आदेश” की चर्चा
शिकायतकर्ता का कहना है कि कई बार वरिष्ठ अधिकारियों से जांच कराने का अनुरोध किया गया। इस बीच विभागीय स्तर पर यह चर्चा सामने आई कि कथित रूप से किसी मंत्री के मौखिक निर्देश के कारण जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
जांच में देरी से उठ रहे सवाल
यदि करोड़ों रुपये के कार्यों को लेकर लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही हैं, तो उनकी समयबद्ध और निष्पक्ष जांच क्यों नहीं कराई जा रही? यही सवाल अब स्थानीय लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि जांच में देरी से विभाग की कार्यप्रणाली पर संदेह और गहरा होता जा रहा है।
पौधारोपण कार्य भी सवालों के घेरे में
शिकायत में यह भी कहा गया है कि कई स्थानों पर पौधारोपण के लिए निर्धारित मानकों के अनुरूप गड्ढे नहीं खोदे गए। कुछ जगहों पर ठूंठ और जड़ें तक नहीं हटाई गईं, जिससे कार्य की गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग
शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पूरे मामले की जांच EOW, विजिलेंस एवं दूसरे वन वृत्त के अधिकारियों की संयुक्त समिति से कराई जाए। साथ ही प्रत्येक कार्य का भौतिक सत्यापन शिकायतकर्ता की उपस्थिति में कराया जाए और यदि अनियमितताएं मिलती हैं तो दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।









