September 17, 2026 3:20 pm

बाजारों में यूपीआई पर ब्रेक, दुकानों पर लगे केवल नकद के पोस्टर

आईएनए न्यूज एजेंसी

नई दिल्ली/पूर्वी दिल्ली। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) के दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 15 अक्टूबर से 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाने के ऐलान से दिल्ली के व्यापारियों में नाराजगी है। पूर्वी दिल्ली के शाहदरा, लक्ष्मी नगर और कृष्णा नगर समेत कई बाजारों में दुकानदारों ने यूपीआई भुगतान लेने से इनकार करना शुरू कर दिया है। कुछ दुकानों पर ग्राहकों को केवल नकद भुगतान करने की सूचना वाले पोस्टर भी लगाए गए हैं।

व्यापारियों का कहना है कि छोटे कारोबार में पहले ही मुनाफे का मार्जिन सीमित है और भुगतान व्यवस्था की अतिरिक्त लागत से उन पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।

पूर्वी दिल्ली के किराना, कपड़े, जनरल स्टोर और अन्य खुदरा कारोबार में रोजाना बड़ी संख्या में ग्राहक यूपीआई से भुगतान करते हैं। व्यापारियों के मुताबिक डिजिटल भुगतान ने लेन-देन को आसान बनाया है और ग्राहकों को नकदी साथ रखने की जरूरत कम हुई है। ऐसे में बड़े भुगतान पर शुल्क की व्यवस्था उन्हें दोबारा नकद लेन-देन की ओर ले जा सकती है।

व्यापारियों की प्रतिक्रियाएं

बृजेश गोयल, चेयरमैन, चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री:
यूपीआई भुगतान पर किसी भी तरह का शुल्क नहीं होना चाहिए। सरकार डिजिटल भुगतान को मजबूत करना चाहती है तो बैंकों और पेमेंट सिस्टम की लागत का समाधान सीधे इंसेंटिव से किया जाए।

परमजीत सिंह पम्मा, अध्यक्ष, सदर बाजार बारी मार्केट ट्रेड्स एसोसिएशन:
छोटे और मध्यम व्यापारियों का मार्जिन पहले ही सीमित है। बड़े यूपीआई भुगतान पर शुल्क लगाने से सीधे मुनाफे पर असर पड़ेगा।

राकेश कुमार यादव, अध्यक्ष, फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेड्स एसोसिएशन:
भुगतान व्यवस्था की लागत भी कारोबारी खर्च का हिस्सा होती है। सरकार को शून्य-शुल्क व्यवस्था जारी रखने पर पुनर्विचार करना चाहिए। लंबे समय में अतिरिक्त लागत का असर कीमतों पर भी पड़ सकता है।

योगेश सिंघल, अध्यक्ष, ऑल बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन:
ग्राहकों की सुविधा के लिए क्यूआर कोड लगाए हैं। बड़े भुगतान पर शुल्क लगाया गया तो नकदी की ओर लौटने की आशंका है।

संतोष कुमार, मोबाइल दुकानदार, हौज खास:
इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार में 2,000 रुपये से अधिक का भुगतान सामान्य है। ग्राहकों के लिए यूपीआई सबसे आसान माध्यम है। अगर शर्त रखी गई तो खरीदारी का अनुभव प्रभावित होगा।

सुमित शर्मा, मखाना कारोबारी:
हमारे कारोबार में हर भुगतान हजारों रुपये का होता है। एमडीआर लगाने पर उसका असर लागत पर आएगा। सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिसमें खर्च व्यापारी की जेब से न निकले।

काजल सिंह, पार्लर संचालिका:
हमारे यहां ज्यादातर बिल 2,000 रुपये से ऊपर के होते हैं। ग्राहक यूपीआई इसलिए करता है क्योंकि उसे नकदी लेकर चलने की जरूरत नहीं पड़ती। अगर हम पर अतिरिक्त लागत आएगी तो उसका असर कारोबार के मार्जिन पर पड़ेगा।

अशोक नागर, कपड़ा व्यापारी, लक्ष्मी नगर:
ग्राहक को यह समझाना मुश्किल होगा कि यूपीआई से भुगतान करने पर उस पर कोई चार्ज नहीं है, लेकिन दुकानदार की लागत बढ़ रही है। ऐसी स्थिति में व्यापारी नकद भुगतान लेने की कोशिश करेगा।

Khabar 30 Din
Author: Khabar 30 Din

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