अब्दुल सलाम क़ादरी। हसदेव क्षेत्र में सिविल विभाग से जुड़े निर्माण एवं रिपेयरिंग कार्यों को लेकर लगातार गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं। आरोप है कि कुछ ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों के बीच कथित सांठगांठ के चलते कार्यों की निगरानी और भुगतान प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र एवं विभागीय जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
क्षेत्र में चर्चा है कि सिविल विभाग से जुड़े कार्यों में सिवेद्र ठाकुर, अजीत मिश्रा और रवि तिवारी की भूमिका को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप लगाने वालों का दावा है कि विभागीय स्तर पर इन लोगों का प्रभाव इतना बढ़ गया है कि संबंधित कार्यों की निगरानी और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता प्रभावित हो रही है।
मामले में सिविल प्रमुख धर्मेंद्र विश्वकर्मा की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि शिकायतों और स्थानीय स्तर पर उठ रही आपत्तियों के बावजूद संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदारों के कार्यों की निगरानी व्यवस्था में अपेक्षित बदलाव नहीं किया गया।
जेकेडी और बिजुरी के कार्यों की निगरानी पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि विभागीय अधिकारी और प्रबंधन इन आरोपों को गंभीरता से लेते हैं, तो जेकेडी में सरद यादव तथा बिजुरी में संजय सिंह की जगह अन्य अधिकारियों को जिम्मेदारी देकर कार्यों की निष्पक्ष निगरानी क्यों नहीं कराई जा रही है।
आरोप लगाने वाले पक्ष का कहना है कि जेकेडी में विनोद गजाविया तथा बिजुरी में अभिनव के साथ अजय त्रिपाठी जैसे अधिकारियों की निगरानी में कार्य कराया जाए, ताकि ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों के बीच किसी भी संभावित मिलीभगत की आशंका समाप्त हो सके।
एमबी और भुगतान की जांच की मांग
पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण मांग एमबी (Measurement Book) और किए गए बिल भुगतानों की जांच की है। आरोप है कि संबंधित फर्मों और इंजीनियरों द्वारा कराए गए कार्यों की एमबी, मौके पर किए गए वास्तविक कार्य, स्वीकृत मात्रा और भुगतान किए गए बिलों का मिलान कराया जाए।
यदि एमबी और बिलों का स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट कराया जाता है, तो कार्यों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। इसी आधार पर यह भी स्पष्ट होगा कि कहीं स्वीकृत कार्य से अधिक भुगतान, गुणवत्ता में कमी अथवा नियमों के विपरीत बिलिंग तो नहीं हुई।
महाप्रबंधक से निष्पक्ष जांच की अपेक्षा
क्षेत्रीय समाचार पत्रों के माध्यम से लगातार प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों का ध्यान इस मामले की ओर आकर्षित कराया जा रहा है। अब आवश्यकता है कि महाप्रबंधक स्तर से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और शिकायतों में लगाए गए प्रत्येक आरोप का दस्तावेजों के आधार पर परीक्षण किया जाए।
यदि आरोप निराधार हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए और यदि अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों, इंजीनियरों और संबंधित ठेकेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
सवाल यह है कि क्या हसदेव क्षेत्र के सिविल कार्यों की एमबी, टेंडर दस्तावेज, कार्यादेश, मौके की वास्तविक स्थिति और बिल भुगतान की स्वतंत्र जांच कराई जाएगी? फिलहाल इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों का पक्ष सामने आना भी बेहद जरूरी है।









