अब्दुल सलाम क़ादरी-प्रधान संपादक
सूरजपुर।
सूरजपुर वन मंडल में वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान खरीदी गई हाईमास्ट सोलर लाइट को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार, वन मंडलाधिकारी (DFO) द्वारा इस खरीदी में भारी वित्तीय गड़बड़ी की गई है। बताया जा रहा है कि इस पूरी प्रक्रिया में नियमों को दरकिनार कर मनमाने ढंग से टेंडर जारी किए गए और उच्च दरों पर सामग्री खरीदी गई?
विश्वसनीय सूत्रों ने खुलासा किया है कि इस खरीद-फरोख्त में लाखों रुपये का घोटाला हुआ है। खास बात यह है कि जब एक सामाजिक कार्यकर्ता द्वारा इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी पाने के लिए सूचना का अधिकार (RTI) के तहत आवेदन लगाया गया, तो विभाग ने जानकारी देने से इनकार कर दिया।
1. वित्तीय वर्ष 2024–25 में हाई मास्ट लाइट/सोलर लाइट की खरीदी हेतु जारी टेंडर नोटिस की प्रति प्रदान की जाए।
2. उपरोक्त खरीद के लिए जारी किए गए क्रय आदेश (Purchase Order) की प्रति उपलब्ध कराई जाए।
3. खरीदी के भुगतान के लिए जारी चेक नंबर, जारी तिथि तथा राशि की जानकारी दी जाए।
4. संबंधित खरीदी के बिल, वाउचर एवं भुगतान विवरण की प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं।
5. खरीदी गई हाई मास्ट लाइट/सोलर लाइट का मेक एवं मॉडल का नाम बताया जाए।
6. प्रत्येक लाइट की गारंटी/वारंटी कार्ड की प्रति प्रदान की जाए।
7. इन लाइटों को किस-किस स्थान पर लगाया गया है, उसका पूरा विवरण (स्थान का नाम, वार्ड नंबर आदि सहित) उपलब्ध कराया जाए। ……उपरोक्त मांगी गई जानकारी देने से इंकार किया गया है????
सूत्रों के मुताबिक, मांगी गई जानकारी में टेंडर नोटिस, क्रय आदेश, भुगतान के चेक नंबर, बिल-वाउचर, लाइटों के मेक और मॉडल सहित लगाए गए स्थानों का विवरण शामिल था — लेकिन वन विभाग ने कोई भी दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं कराया। इससे यह संदेह और गहराता जा रहा है कि विभाग के भीतर जानकारी छिपाई जा रही है ताकि भ्रष्टाचार को ढका जा सके।
जानकारी के मुताबिक, सूरजपुर वन मंडल के तहत अलग-अलग बीटों में हाईमास्ट सोलर लाइट लगाने के नाम पर मोटा बिल पास कर भुगतान कर दिया गया, जबकि कई स्थानों पर लाइटें लगाई ही नहीं गईं या फिर घटिया गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग किया गया।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इस पर जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यदि विभाग के पास छिपाने को कुछ नहीं है, तो उसे सभी दस्तावेज़ सार्वजनिक करने चाहिए।
“आरटीआई में जानकारी न देना ही इस बात का सबूत है कि कुछ बड़ा गड़बड़ है। जनता के पैसों से खरीदी गई चीज़ों का हिसाब जनता से क्यों छिपाया जा रहा है?”
अब सवाल यह है कि क्या सूरजपुर वन मंडल में हुई इस संदिग्ध खरीदी पर विजिलेंस या ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो) की जांच होगी या मामला यूं ही दबा दिया जाएगा?









