सिद्धार्थनगर में शनिवार को एक बड़ा हादसा हो गया, जहां कांशीराम आवास स्थित पानी की टंकी की सीढ़ी अचानक टूटकर गिर गई। इस हादसे के वक्त टंकी पर पांच बच्चे मौजूद थे। सीढ़ी टूटने से तीन बच्चे नीचे गिर गए, जिनमें से एक की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दो अन्य को गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है।
वहीं, दो किशोर टंकी के ऊपर ही फंसे रह गए। सूचना मिलने पर गोरखपुर से एसडीआरएफ की टीम पहुंची, लेकिन रास्ता न बन पाने के कारण वे रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं चला सके। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने पहल की और रविवार सुबह करीब 5 बजे हेलीकॉप्टर मंगवाया गया। काफी मशक्कत के बाद हेलीकॉप्टर की मदद से एक-एक कर दोनों किशोरों को सुरक्षित नीचे उतारा गया।
मामला जानिए
जानकारी के मुताबिक, शनिवार दोपहर करीब दो बजे पानी की टंकी की सीढ़ी अचानक टूट गई, जिससे दो किशोर ऊपर ही फंस गए।शाम 6 बजे एसआई कामरान के नेतृत्व में गोरखपुर से 20 सदस्यीय टीम मौके पर पहुंची। टीम ने भारी वाहनों को अंदर ले जाने के लिए रास्ता बनाने की कोशिश की, लेकिन खराब भौगोलिक स्थिति और असुरक्षित सड़क के कारण सफलता नहीं मिल सकी। रात का घटनाक्रम रेस्क्यू में बाधा के बीच बूंदाबांदी भी शुरू हो गई, जिससे ऑपरेशन और कठिन हो गया। टंकी पर फंसे किशन, पवन और कल का हौसला बढ़ाने के लिए नीचे मौजूद लोग रात भर डटे रहे। रविवार सुबह 5 बजे जिला प्रशासन की तत्परता से सुबह 5 बजे हेलीकॉप्टर पहुंचा और 15 घंटे से अधिक समय से फंसे दोनों किशोरों को एक-एक कर सुरक्षित नीचे उतार लिया गया।
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परिजन परेशान थे
हादसे के बाद से ही बच्चों के परिजन बेहद परेशान और डरे हुए थे। पूरी रात उन्होंने अपनों की सलामती की दुआ मांगते हुए टंकी के नीचे ही गुजारी। प्रशासन की इस सफल कोशिश के बाद बच्चों को सुरक्षित देख परिजनों ने राहत की सांस ली।
15 घंटे से अधिक फंसे रहे
पानी की टंकी पर 15 घंटे से अधिक समय तक फंसे रहे दोनों किशोरों तक मदद पहुंचाने के लिए प्रशासन ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया। रास्ता न होने के कारण जब टीम ऊपर नहीं पहुंच सकी, तो ड्रोन के जरिए रस्सी ऊपर भेजी गई। जैसे ही बच्चों ने ड्रोन द्वारा गिराई गई रस्सी को पकड़ा, नीचे मौजूद टीम ने उसमें राहत सामग्री बांध दी। इसके माध्यम से बच्चों तक पानी की बोतलें और बिस्किट पहुंचाए गए। रात का वक्त होने के कारण प्रशासन ने इसी तरीके से बच्चों के लिए खाना भी ऊपर भेजा, ताकि वे खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें








