नई दिल्ली । भारत में 92 प्रतिशत कार्यकारी अधिकारी कृत्रिम मेधा (एआई) अपनाने में सुरक्षा संबंधी चुनौतियों को सबसे बड़ा अवरोध मानते हैं। उन्हें लगता है कि विश्वास को बढ़ावा देने और जोखिमों को कम करने के लिए मजबूत ढांचे की जरूरत है। एक रिपोर्ट के अनुसार 13 बाजारों में 900 वरिष्ठ अधिकारियों के बीच किए गए सर्वेक्षण से पता चला कि भारतीय अधिकारियों की अधिकतर चिंता कृत्रिम इंटेलिजेंस की सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से है। रिपोर्ट में उच्च उत्साह के बावजूद भारतीय अधिकारियों को अभी भी एआई का व्यापक उपयोग करने में कठिनाई महसूस होती है। उन्हें डेटा के सुरक्षा खतरों और नैतिकता से संबंधित चिंताएं हैं। इससे सामने आया कि आधे से अधिक प्रौद्योगिकी अधिकारी इसे सरल चालित करने के लिए तैयार नहीं मानते। एआई के इस्तेमाल के लिए एक मजबूत ढांचे की आवश्यकता पर रिपोर्ट ने जोर दिया। इसके लिए तकनीकी सहयोग और कौशल उन्नयन की आवश्यकता है। विश्वास बढ़ाने और जोखिम कम करने के लिए अधिक नैतिकता और ताकतवर ढांचे को महत्व दिया जाना चाहिए। रिपोर्ट ने भारतीय संगठनों को एआई की एकीकृत क्रियान्वयन में सक्षम बनाने की सलाह दी है ताकि इसे स्थायी रूप से अपनाया जा सके। व्यवसाय को विश्वास दिलाकर जोखिम को कम करने के लिए एआई की क्षमताओं का उपयोग विशेष महत्व है।
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भारत में सुरक्षा संबंधी चुनौतियां एआई अपनाने में बड़ी बाधा: रिपोर्ट
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