June 12, 2026 12:05 am

अंश की तलाश अधूरी, सवालों से घिरी पुलिस की पूरी कहानी

चार सेकंड के वीडियो से लेकर दोस्तों के फोन तक नहीं खंगाल सकी पुलिस, सात माह बाद भी रहस्य जस का तस

प्रतीक मिश्रा (7024206069)

शहडोल। सोहागपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत नवलपुर स्थित सोन नदी में सात माह पूर्व लापता हुए अंश का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। समय बीतने के साथ जहां मामले की गुत्थी और उलझती जा रही है, वहीं अंश की मां आज भी इस सवाल का जवाब तलाश रही हैं कि उनका बेटा वास्तव में नदी में डूबा था या फिर उसके साथ किसी साजिश को अंजाम दिया गया। मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मां की जिद रही अनसुनी, जांच में दिखी सुस्ती

परिजनों का आरोप है कि घटना के शुरुआती दिनों से ही उन्होंने कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जांच की मांग की थी लेकिन उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया। अंश की मां का कहना है कि यदि समय रहते कुछ पहलुओं पर जांच की जाती तो शायद मामले की सच्चाई सामने आ सकती थी। सात माह बाद भी न तो शव बरामद हुआ और न ही किसी ठोस निष्कर्ष तक जांच पहुंच सकी है।

दोस्तों की भूमिका पर उठ रहे सवाल

घटना के समय अंश अपने कुछ दोस्तों के साथ था। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने दोस्तों के मोबाइल फोन की विस्तृत जांच नहीं की और न ही उनके कॉल डिटेल रिकॉर्ड तथा अन्य डिजिटल साक्ष्यों को गंभीरता से खंगाला। इतना ही नहीं घटना से जुड़ा बताया जा रहा एक चार सेकंड का वीडियो भी जांच का केंद्र नहीं बन सका, जबकि परिजनों का मानना है कि यह वीडियो कई अहम सवालों के जवाब दे सकता है।

लाखों के लेन-देन की चर्चा बनी सुर्खियां

मामले में लाखों रुपये के कथित लेन-देन की चर्चाएं भी क्षेत्र में लगातार सुर्खियां बटोर रही हैं। हालांकि इन चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन स्थानीय स्तर पर इसे लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। परिजनों का कहना है कि यदि आर्थिक लेन-देन से जुड़े पहलुओं की भी गहन जांच हो तो कई तथ्य सामने आ सकते हैं।

डूबने की घटना या सुनियोजित साजिश?

सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि अंश वास्तव में सोन नदी में डूबा था या फिर उसके दोस्तों ने किसी साजिश के तहत घटना को हादसे का रूप दिया। शव नहीं मिलने और कई बिंदुओं पर जांच अधूरी रहने से संदेह लगातार गहराता जा रहा है।

दुबारा जांच की मांग

अंश के परिजनों ने मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय पुनः जांच की मांग की है। उनका कहना है कि आधुनिक तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल रिकॉर्ड, वीडियो फुटेज और संबंधित व्यक्तियों से दोबारा पूछताछ कराई जाए ताकि सात माह से चले आ रहे इस रहस्य से पर्दा उठ सके और अंश के परिवार को न्याय मिल सके।

2010 के सरफा डैम कांड की यादें हुई ताजा

ज्ञात हो कि इस मामले ने 2010 के चर्चित सरफा डैम प्रकरण की यादें ताजे कर दी है। उस समय पिकनिक मनाने गए दोस्तों के बीच एक युवक की डूबने से मौत हुई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने गहन जांच की थी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर साथ गए दोस्तों के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें सलाखों के पीछे भेजा था। परिजनों का आरोप है कि घटना के दिन मौजूद लोगों से जुड़े कई महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच अब तक अधूरी है। वहीं अब यह चर्चा भी जोर पकड़ रहा है कि यदि जांच सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर दुबारा की गई तो अंश के साथ मौजूद दोस्तों पर भी कानूनी कार्रवाई की गाज गिर सकती है और सात माह से रहस्य बना यह मामला नए खुलासों तक पहुंच सकता है।

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