March 19, 2026 1:05 pm

गोरतरा में कानून बेबस, अवैध भट्ठों का धंधा बेलगाम

अजीत के नाम पर धधक रहा कारोबार, नियम-कानून धुएं में, जिम्मेदार बेखबर

प्रतीक मिश्रा (7024206069)

शहडोल। सोहागपुर थाना क्षेत्र के गोरतरा गांव में अवैध ईंट भट्ठों का मुद्दा अब सिर्फ शिकायतों तक सीमित नहीं रहा बल्कि यह खुलेआम कानून की अवहेलना और प्रशासनिक निष्क्रियता की कहानी बन चुका है। गांव में जिस नाम की सबसे ज्यादा चर्चा है वह अजीत का है, जिसे ग्रामीण इन भट्ठों के संचालन और पूरे नेटवर्क का मुख्य चेहरा बता रहे हैं।

नियमों को ठेंगा दिखाकर चल रहा कारोबार

गोरतरा में संचालित ईंट भट्ठों की स्थिति यह संकेत देती है कि यहां नियमों का पालन नाम मात्र को भी नहीं हो रहा। जानकारों की माने तो भट्ठों के पास न तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनिवार्य अनुमति है और न ही संचालन से जुड़े जरूरी दस्तावेज। इसके बावजूद लंबे समय से उत्पादन जारी है। आधुनिक जिग-जैग तकनीक की जगह पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले तरीकों का उपयोग किया जा रहा है। कोयले का भारी इस्तेमाल पूरे क्षेत्र को जहरीले धुएं से भर रहा है।

धुएं में घुट रहा गांव, खेत भी हो रहे बर्बाद

ग्रामीणों का कहना है कि बगईहा नाला के पास चल रहे इन भट्ठों से निकलने वाला धुआं अब गांव की पहचान बन चुका है। दिन-रात आसमान में छाया रहने वाला धुआं न केवल वातावरण को प्रदूषित कर रहा है बल्कि खेती-किसानी पर भी सीधा असर डाल रहा है। खेतों में गिरती राख और प्रदूषण से फसल की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। लोगों का कहना है कि अजीत के भट्ठों का धुआं अब उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गया है।

सेहत पर सीधा हमला, बच्चे-बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित

गांव में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। बच्चों में सांस लेने में दिक्कत, खांसी और एलर्जी के मामले सामने आ रहे हैं, जबकि बुजुर्गों की हालत और गंभीर बताई जा रही है। लगातार कोयले के धुएं के संपर्क में रहना खतरनाक साबित हो सकता है लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

कार्रवाई नहीं, सवाल ही सवाल

प्रशासन की भूमिका को लेकर अब ग्रामीण खुलकर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि खनिज विभाग और पुलिस को कई बार शिकायतें दी गईं लेकिन हर बार मामला दबा दिया गया। दिन-रात उठता धुआं साफ नजर आने के बावजूद कार्रवाई का अभाव यह संकेत देता है कि कहीं न कहीं इस अवैध धंधे को संरक्षण मिल रहा है। अजीत का नाम लगातार सामने आने के बावजूद उस पर कोई सख्त कार्रवाई न होना भी इसी दिशा में इशारा करता है।

कानून सख्त, लेकिन अमल गायब

नियम स्पष्ट हैं कि बिना अनुमति ईंट भट्ठा चलाना पूरी तरह गैरकानूनी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनुमति, खनन विभाग से मिट्टी उत्खनन की स्वीकृति और पर्यावरण मानकों का पालन अनिवार्य है। उल्लंघन की स्थिति में भट्ठा सील किया जा सकता है, भारी जुर्माना लगाया जा सकता है और संचालक के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज हो सकता है। इसके बावजूद गोरतरा में हालात जस के तस बने हुए हैं।

आंदोलन की चेतावनी, बढ़ सकता है मामला

ग्रामीणों ने अब स्पष्ट कर दिया है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे और मामले को उच्च स्तर तक ले जाएंगे। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक गांव का मुद्दा नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर संकट है। गोरतरा में उठता धुआं अब केवल प्रदूषण का प्रतीक नहीं बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारी पर उठते बड़े सवालों का संकेत बन चुका है। बहरहाल अब देखना यह है कि अजीत के नाम से चल रहे इस अवैध साम्राज्य पर कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

विज्ञापन
Advertisement
error: Content is protected !!